कानपुर नगर के कल्याणपुर क्षेत्र से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासन दोनों को कटघरे में खड़ा कर दिया है. अंबेडकरपुरम स्थित मेडलाइफ हॉस्पिटल में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट और किडनी तस्करी के बड़े रैकेट का खुलासा होने की आशंका है.
दरअसल, सोमवार दोपहर पुलिस को मिली गुप्त सूचना के बाद हड़कंप मच गया. शुरुआती जांच में ही कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए, जिसके बाद पुलिस ने अस्पताल संचालकों, दलाल और अन्य संदिग्धों समेत 4–5 लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी. शहर और बाहरी जनपदों में भी ताबड़तोड़ छापेमारी जारी है.
सूत्रों के मुताबिक, ‘शिवम’ नाम का एक दलाल मरीज को लेकर आया था, जिसकी किडनी खराब थी. उसे पहले मेडलाइफ हॉस्पिटल लाया गया, फिर केशवपुरम स्थित आहूजा मेडिकल सेंटर में गुपचुप ऑपरेशन किया गया—जबकि कानपुर में किडनी ट्रांसप्लांट की अनुमति केवल एक ही निजी अस्पताल को है.
सबसे बड़ा सवाल यही है—आखिर किडनी आई कहां से?
पुलिस को शक है कि मामला सिर्फ अवैध ट्रांसप्लांट तक सीमित नहीं, बल्कि किडनी चोरी और अंतरजनपदीय तस्करी नेटवर्क से भी जुड़ा हो सकता है. जांच के दौरान मेरठ निवासी ‘आयुष’ नाम के मरीज ने दावा किया कि उसे किडनी उसके रिश्तेदार ने दी, लेकिन दूसरी तरफ एक युवक (डोनर) ने कैमरे पर खुलासा किया कि उसने अपनी किडनी 4 लाख रुपये में बेची, लेकिन अभी तक पैसे नहीं मिले. उसने खुद को एमबीए फाइनल ईयर का छात्र बताया है.
ट्रांसप्लांट में नहीं पूरी की गई कानूनी प्रकिया
हैरानी की बात ये भी है कि ट्रांसप्लांट जैसे गंभीर मामले में जरूरी मेडिकल दस्तावेज, अनुमति और कानूनी प्रक्रिया पूरी ही नहीं की गई. जैसे-जैसे मामला गहराता गया, देर रात पुलिस ने डोनर को दूसरे स्थान पर शिफ्ट कर दिया, जबकि महिला रिसीवर को भी प्रिया हॉस्पिटल से कहीं और भर्ती कराया गया.
पुलिस के हाथ लगे कई अहम सुराग- सूत्र
स्वास्थ्य विभाग और पुलिस अधिकारी फिलहाल कुछ भी बोलने से बच रहे हैं, लेकिन इशारों में साफ कर दिया गया है कि मामला बेहद गंभीर और बड़ा है. सूत्रों का दावा है कि पुलिस को कई अहम सुराग मिले हैं और जल्द ही इस पूरे किडनी कांड का बड़ा खुलासा हो सकता है. कानपुर में सामने आया यह किडनी कांड अब सिर्फ एक अस्पताल तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि इसके तार एक बड़े संगठित नेटवर्क से जुड़ते नजर आ रहे.
