पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर कानपुर जिले के पनकी स्थित एचडीएफसी बैंक की एक महिला कर्मचारी, आस्था सिंह का वीडियो जबरदस्त तरीके से वायरल हो रहा है। वीडियो में आस्था को ‘मैं ठाकुर हूं’ कहते और बहस करते देखा गया था। अब इस मामले में नया मोड़ आ गया है। बैंककर्मी आस्था सिंह ने एक नया वीडियो जारी कर अपना पक्ष रखा है और बताया है कि वायरल वीडियो की सच्चाई क्या है।

‘जातिवाद नहीं, स्वाभिमान की बात है’
आस्था सिंह ने अपने नए वीडियो की शुरुआत ‘जय श्री राम’ से की। उन्होंने बताया कि वायरल हो रहा वीडियो 6 जनवरी का है, न कि हाल-फिलहाल का। सबसे महत्वपूर्ण बात जो उन्होंने साफ की, वह यह कि वीडियो में दिख रहा व्यक्ति कोई ग्राहक (Customer) नहीं था, बल्कि उनके साथ काम करने वाली एक महिला कर्मचारी का पति था।

क्या था विवाद का असली कारण?
आस्था के मुताबिक, उनके साथ काम करने वाली एक महिला सहकर्मी ने इस्तीफा (Resignation) दिया था और वह उसी दिन कार्यमुक्त (Relieving) होना चाहती थीं। इसी बात को लेकर आस्था की बहस सहकर्मी की ननद से हो गई।

अभद्रता का आरोप: आरोप है कि शाम को सहकर्मी के पति बैंक पहुँचे और आस्था के साथ बदतमीजी की।

जाति पर सवाल: आस्था का दावा है कि उस व्यक्ति ने उनकी ‘हेकड़ी’ निकालने की धमकी दी और उनकी जाति को लेकर सवाल किए।

आस्था का तर्क: बैंककर्मी ने स्वीकार किया कि गुस्से में उन्होंने जो शब्द कहे वह तीखे थे, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि वह अपनी पहचान और ठाकुर होने पर गर्व करती हैं।

वायरल वीडियो और पुराने आरोप
इससे पहले वायरल हुए वीडियो में दिख रहा था कि आस्था सिंह बैंक के अंदर किसी से बुरी तरह भिड़ गई हैं। वीडियो में वह मेज पर रखे कागज फेंकती और आक्रामक अंदाज में ‘मैं ठाकुर हूं’ कहती नजर आ रही थीं। उस समय इसे ‘ग्राहक के साथ बदतमीजी’ और ‘जातिवाद’ से जोड़कर पेश किया गया था। लेकिन अब आस्था ने साफ कर दिया है कि वह किसी कस्टमर से नहीं, बल्कि निजी विवाद में अपनी रक्षा कर रही थीं। फिलहाल, इस सफाई के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। बैंक प्रशासन और स्थानीय स्तर पर मामले की गहराई से जांच की जा रही है कि आखिर उस दिन बैंक के अंदर सुरक्षा और प्रोटोकॉल का उल्लंघन किसने किया था।

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