असम की राजनीति में बुधवार को एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला। कांग्रेस से इस्तीफा देने के महज कुछ ही घंटों के भीतर, नागांव से लोकसभा सांसद प्रद्युत बोरदोलोई औपचारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गए। नई दिल्ली में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप सैकिया की मौजूदगी में उन्होंने भगवा दामन थामा।

इस्तीफे की बड़ी वजह

भाजपा में शामिल होने के बाद बोरदोलोई ने मीडिया से बात करते हुए कांग्रेस नेतृत्व पर तीखे प्रहार किए। उन्होंने अपने निष्कासन और दल बदलने के पीछे के दर्द को साझा किया। बोरदोलोई ने आरोप लगाया कि असम कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें बार-बार अपमानित किया, जिससे वे मानसिक रूप से टूट चुके थे। उन्होंने बताया कि वे पार्टी के संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल से मिलने के लिए घंटों इंतजार करते रहे, लेकिन उन्हें मिलने का समय तक नहीं दिया गया। बोरदोलोई के अनुसार, असम कांग्रेस में अब उनके जैसे पुराने और समर्पित नेताओं के लिए कोई जगह या अनुकूल माहौल नहीं बचा है।

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भावुक हुए बोरदोलोई

पार्टी छोड़ने के बावजूद बोरदोलोई थोड़े भावुक नजर आए। उन्होंने स्वीकार किया कि उनका राजनीतिक वजूद कांग्रेस की ही देन है। उन्होंने कहा “आज मैं जो कुछ भी हूँ, कांग्रेस की वजह से हूँ। मैंने अपना पूरा जीवन इस पार्टी को दिया, लेकिन आज मुझे वहां पूरी तरह अकेला महसूस कराया गया। भारी मन से मुझे यह कदम उठाना पड़ा।”

कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती

विधानसभा चुनावों की तैयारियों में जुटी कांग्रेस के लिए प्रद्युत बोरदोलोई का जाना एक “अपूरणीय क्षति” माना जा रहा है। बोरदोलोई न केवल एक सांसद हैं, बल्कि असम सरकार में कद्दावर मंत्री भी रह चुके हैं। उनके जाने से नागांव और आसपास के क्षेत्रों में कांग्रेस का आधार कमजोर हो सकता है।

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