मुंबई | हवाई अड्डे पर सीमा शुल्क अधिकारियों के बढ़ते भ्रष्टाचार के मामलों को देखते हुए सीमा शुल्क आयुक्त ने कस्टम अधिकारियों की शर्ट पर बॉडी वॉर्न कैमरे लगाने का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है। इससे यदि अधिकारियों और यात्रियों के बीच आरोप-प्रत्यारोप के मामले कम हुए तो इसे नियमित रूप से लागू कर दिया जाएगा। ये कैमरे मुख्य रूप से उन सीमा शुल्क अधिकारियों की वर्दी पर लगाए जाएंगे जो रेड चैनल गेट की ड्यूटी पर तैनात रहते हैं।
जिससे यात्री और अधिकारी के बीच हुई बातचीत कैमरे में रिकॉर्ड हो जाएगी। कस्टम विभाग के इस कदम से भ्रष्टाचार पर लगाम लगने की उम्मीद है। रिश्वतखोरी पर कार्रवाई साल 2023 में मुंबई हवाई अड्डे पर सीमा शुल्क विभाग के अधिकारियों के भ्रष्टाचार में संलिप्तता के कई मामले सामने आए हैं। इन मामलों में कांस्टेबल से लेकर अधीक्षक रैंक के अधिकारी शामिल हैं। सीबीआई ने तीन मामलों में भ्रष्टाचार का केस भी दर्ज किया है।
कुछ अधिकारियों ने जी-पे जैसे ऑनलाइन भुगतान के माध्यम से रिश्वत ली थी। इन प्रकरणों पर लगाम लगाने के लिए कस्टम विभाग के 33 अधिकारियों का तबादला भी किया गया था। बॉडी वॉर्न कैमरे की उपयोगिता कस्टम विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दैनिक भास्कर को बताया कि मुंबई एयरपोर्ट से रोजाना हजारो यात्री सफर करते हैं। ऐसे में सभी की व्यक्तिगत जांच करना संभव नहीं है। जो भी यात्री 50 हजार के ऊपर की सामग्री लेकर आते हैं उन्हें खुद ब खुद मूल्यवान चीजों को घोषित करना चाहिए। कई बार यात्री बिना बताए ग्रीन चैनल से बाहर निकलने का प्रयत्न करते हैं लेकिन जब कस्टम अधिकारियों को उन पर शक होता है तो यात्रियों को रोककर बैगेज चेक किए जाते हैं। कई यात्री रेड चैनल में खुद आकर अपने मूल्यवान वस्तु को डिक्लेयर तो करते हैं लेकिन कस्टम ड्यूटी कम भरना पड़े इसलिए वस्तु की कीमत कम बताते हैं। जहां विवाद उत्पन्न होता है, तब यह कैमरा काफी मददगार साबित होगा।
खाड़ी देशों से आनेवालों पर पैनी नजर कस्टम अधिकारी ने बताया कि कई बार खुफिया सोर्स हमें जानकारी दे देते हैं कि फला फ्लाइट में फला यात्री महंगी वस्तुएं लेकर जा रहा है। ऐसे में हवाई अड्डे पर पहुंचते ही कस्टम विभाग कार्रवाई करता है। कस्टम विभाग की नजर खाड़ी देश और विशेषकर दुबई से आ रही फ्लाइट पर अधिक रहती है। कैमरे का काम, भ्रष्टाचार का काम तमाम इस कैमरे की खासियत यह है कि यह छोटा है और उपयोग में सुविधाजनक है। जीपीएस के माध्यम से यह सीधे नियंत्रण कक्ष से जुड़ा रहता है। बॉडी वॉर्न कैमरे से कस्टम विभाग के कार्यों में पारदर्शिता आएगी। यह कैमरा एक बार चार्ज होने के बाद कुल 16 घंटे तक चलता है।

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