लोकसभा चुनाव से ठीक पहले देवबंद दारुल ने बड़ा एलान कर दिया है। लोकसभा चुनाव तक किसी भी राजनीतिक दल के नेता का इस्तकबाल यानी स्वागत उलेमा नहीं करेंगे। ऐसा इसलिए किया गया है कि चुनाव के दौरान नेता दारुल उलूम में आकर वोटरों को भ्रमित करने का प्रयास कर सकते हैं। इसलिए चुनाव तक देवबंद दारुल उलूम नेताओं से दूरी बनाकर रखेगा।
दरअसल देवबंद दारुल उलूम से जुड़े मुसलमानों की संख्या देशभर में है। करोड़ों की संख्या में लोग देवबंद दारुल उलूम के फैंसलों का अनुपालन करते हैं। ऐसे में वोटरों को साधने के लिए चुनाव के समय नेता दारुल उलूम का रुख करते हैं। यहां उलेमाओं के साथ अपनी फोटो सोशल मीडिया पर वायरल करते हैं। इसी को देखते हुए दारुल उलूम ने चुनाव तक राजनीतिक दलों और नेताओं से उचित दूरी बनाए रखने का निर्णय किया है।
एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार देवबंद दारुल उलूम के मोहतमिम अबुल कासिम नोमानी ने साफ शब्दों में कहा है कि चुनाव के दौरान देवबंद दारुल उलूम किसी भी राजनीतिक दल का समर्थन नहीं करेगा। वोट यानी मत हर नागरिक का अपना अधिकार है। हर नागरिक को सोच समझकर ही देश हित में वोट करना चाहिए। ऐसे में देवबंद दारुल कोई ऐसा कदम नहीं उठाना चाहता जिससे किसी व्यक्ति विशेष या धर्म विशेष के वोटर का मत प्रभावित होता हो।
मौलाना अबुल कासिम नोमानी ने अपने एक बयान में कहा है कि किसी नेता के आने पर पाबंदी नहीं है लेकिन राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों या नेताओं का स्वागत देवबंद दारुल नहीं करेगा। इतना ही नहीं उन्होंने यह भी साफ कर दिया है कि दारुल उलूम के उलेमा ना तो किसी नेता का स्वागत करेंगे और ना ही मुलाकात करेंगे। उन्होंने बताया कि सामान्य दिनों में नेता आते हैं तो उनका स्वागत दारुल उलूम में किया जाता है।
दरअसल यह पाबंदी यूं हीं नहीं लगाई गई, कुछ वर्ष पहले एक पार्टी के मुखिया देवबंद दारुल उलूम पहुंचे थे। उनके साथ एक स्थानीय नेता भी थे। मुलाकात के दौरान पूर्व मोहतमिम का हाथ स्थानीय नेता के सिर पर रखवाकर फोटो करा लिया गया था। बाद में उस फोटो को दूसरे तरीके से पेश करके फोटो का दुरूपयोग किया गया था। इसी को देखते हुए अब दारुल उलूम ने यह निर्णय किया है।
