ईरान प्रदर्शनों का काला व भयावह सच सामने आया है जिसने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है। ईरान में सरकार-विरोधी प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों की कार्रवाई को लेकर बेहद गंभीर मानवाधिकार आरोप सामने आए हैं। ईरानी-जर्मन पत्रकार माइकल अब्दुल्लाही ने दावा किया है कि प्रदर्शनों को दबाने के लिए ईरानी शासन ने महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा और अमानवीय व्यवहार को हथियार की तरह इस्तेमाल किया।एक ईरानी-जर्मन पत्रकार के अनुसार, ईरान में प्रदर्शनकारियों पर की गई कार्रवाई में सिर्फ हजारों लोगों की हत्या ही नहीं हुई, बल्कि महिलाओं के खिलाफ बलात्कार और अंग-भंग को भी हथियार की तरह इस्तेमाल किया गया।

 

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यूरोपीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, हिरासत में ली गई कई महिला प्रदर्शनकारियों को धमकियां दी गईं, उनके साथ दुर्व्यवहार हुआ और उन्हें शारीरिक व मानसिक यातनाएं दी गईं। जर्मन अखबार डाइ वेल्ट में प्रकाशित प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों में भी हिरासत के दौरान महिलाओं के साथ गंभीर अत्याचार के आरोप लगाए गए हैं।अब्दुल्लाही ने प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से  कहा कि प्रदर्शन में शामिल महिलाओं के साथ बलात्कार किया गया, उनके गर्भाशय (Uterus) निकाल दिए गए, सिर की खाल उधेड़ दी गई और शरीर पर सिगरेट से जलाने के निशान बनाए गए।

अब्दुल्लाही ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए अपने बयानों में कहा कि उन्हें ऐसे कई प्रत्यक्ष विवरण मिले हैं, जिनमें इस्लामी शासन का विरोध करने वाली महिलाओं को निशाना बनाए जाने की बात कही गई है। ये आरोप ऐसे समय सामने आए हैं, जब दिसंबर 2025 से शुरू हुए आर्थिक संकट विरोधी प्रदर्शन धीरे-धीरे ईरान में व्यापक सरकार-विरोधी आंदोलन में बदल गए। ब्रिटिश अखबार द गार्डियन और मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्टों में भी हिरासत में महिला प्रदर्शनकारियों के साथ यौन हिंसा और क्रूरता के आरोप सामने आए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, प्रदर्शनों को दबाने के लिए सरकार ने इंटरनेट सेवाएं बंद कर दीं और IRGC की बसीज मिलिशिया सहित अतिरिक्त बलों को तैनात किया गया।

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने इन प्रदर्शनों को इस्लामी शासन को गिराने की ‘विदेशी साजिश’ करार दिया है। मृतकों की संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं  सरकारी आंकड़ों और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के अनुमानों में बड़ा अंतर बताया जा रहा है। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि कई मामलों की जांच अभी जारी है। अब्दुल्लाही के अनुसार, भारी दमन और जनहानि के बावजूद ईरान में सरकार-विरोधी आवाजें पूरी तरह शांत नहीं हुई हैं और देश गहरे सामाजिक आघात के दौर से गुजर रहा है।

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