भारतीय रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन (IRCTC) ने एक बड़े रेलवे टिकट धोखाधड़ी का खुलासा किया है। ठगों ने ऐसी नकली वेबसाइट्स बनाईं जो देखने में बिल्कुल असली IRCTC वेबसाइट्स जैसी लगती थीं, लेकिन असल में फर्जी थीं और इन्हें IRCTC की कोई अनुमति नहीं थी। इन फर्जी वेबसाइट्स के जरिए देशभर में लोगों को अवैध रूप से रेलवे टिकट बेचे गए, जिससे आम जनता को चूना लगा और अपराधियों ने खूब फायदा कमाया।

CBI की चार्जशीट और कोर्ट की कार्रवाई
दिल्ली की एक अदालत ने हाल ही में इस मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा दायर चार्जशीट का संज्ञान लिया और सुनवाई शुरू करने का आदेश दिया है। राउस एवेन्यू कोर्ट के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट दीपक कुमार ने 8 जुलाई को अपने आदेश में कहा, “सभी तथ्यों और सबूतों को देखते हुए मैं इस मामले को स्वीकार करता हूं। सभी आरोपियों को कोर्ट में पेश होने के लिए समन भेजा जाए।” इस मामले की अगली सुनवाई अब 10 सितंबर को होगी।

कैसे सामने आया ये बड़ा घोटाला?
इस पूरे धोखाधड़ी का खुलासा 2020 में हुआ, जब IRCTC के आईटी सेंटर, नई दिल्ली में कार्यरत एंटी-फ्रॉड मैनेजर राकेश कुमार मिश्रा ने द्वारका के साइबर क्राइम सेल में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि कुछ वेबसाइट्स एक विशेष सॉफ्टवेयर का उपयोग कर रही हैं, जिसके जरिए रेलवे की आरक्षित टिकटें बिना किसी वैध अनुमति के बेची जा रही हैं।

CBI की जांच और फर्जी वेबसाइट्स की पहचान
शिकायत मिलते ही CBI ने तत्काल FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी। जांच में कुल पांच वेबसाइट्स की पहचान हुई जो इस फर्जीवाड़े में शामिल थीं:
www.tatkalsoftware.asia
redmirchie.com
irctctatkalsoftware.co.in
freetatkalsoftware.com
tatkalsoftwarebest.in
ये सभी वेबसाइट्स एक विशेष, गैरकानूनी सॉफ्टवेयर के माध्यम से टिकट बुक कर रही थीं।

प्रमुख आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारियां
CBI की जांच में सबसे पहले राकेश कुमावत का नाम सामने आया, जिसने कबूल किया कि उसने यह अवैध सॉफ्टवेयर अजॉय नामक व्यक्ति से खरीदा था। इस कड़ी में अगला नाम आसिफ अली का था, जो इन फर्जी वेबसाइट्स में से एक को चला रहा था। 1 सितंबर 2021 को CBI ने आसिफ अली के ठिकानों पर छापेमारी की, जहाँ से तीन मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, छह सिम कार्ड, बैंक के दस्तावेज और इस अवैध सॉफ्टवेयर से संबंधित जानकारी वाली एक डायरी मिली। आसिफ अली को तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया। जांच में यह भी सामने आया कि आसिफ IRCTC का अधिकृत एजेंट नहीं था, फिर भी वह पांच अलग-अलग बैंक खातों और ई-वॉलेट्स के जरिए एजेंटों और सॉफ्टवेयर बेचने वालों के साथ लेन-देन कर रहा था।

बाद में, 19 अप्रैल 2023 को CBI ने रोहित कुमार मौर्य और राजीव कुमार मौर्य के ठिकानों पर भी छापे मारे। इन छापों में एक लैपटॉप, कई IRCTC आईडी वाली चिट्ठियां, एजेंट आईडी के डिजिटल सिग्नेचर वाली सीडी और एक डायरी बरामद हुई, जिससे पता चला कि ये दोनों भी इस पूरे रैकेट का हिस्सा थे।

आम लोगों से वसूली जा रही थी ज्यादा कीमत
CBI का कहना है कि इन फर्जी वेबसाइट्स के जरिए कुछ एजेंट टिकट बुक कर रहे थे और बदले में आम लोगों से निर्धारित मूल्य से अधिक पैसे वसूल रहे थे। FIR में बताया गया है कि इससे आम जनता को आर्थिक नुकसान हो रहा था, जबकि एजेंट, वेबसाइट चलाने वाले और सॉफ्टवेयर बनाने वाले अवैध तरीके से कमाई कर रहे थे। ये वेबसाइट्स बैंक और IRCTC के OTP (वन टाइम पासवर्ड) सिस्टम को भी चकमा दे रही थीं और बड़े ही हाई-टेक तरीके से इस पूरे फर्जीवाड़े को अंजाम दे रही थीं। CBI ने इसे एक बड़ा साइबर और आर्थिक अपराध बताया है।

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