सस्ते आयातित तेलों के आगे महंगा बैठने वाले घरेलू तेल-तिलहनों की कीमतों के टिक नहीं पाने के कारण सोयाबीन, मूंगफली तेल-तिलहन, कच्चा पामतेल एवं पामोलीन तथा बिनौला तेल कीमतों में गिरावट देखने को मिली। दूसरी ओर नीचे भाव में बिकवाली से बचने के लिए किसानों के द्वारा मंडियों में रोक- रोक कर अपनी उपज लाने के कारण सरसों तेल-तिलहन कीमतों में मामूली सुधार रहा। बाजार के जानकार सूत्रों ने कहा कि विदेशों में खाद्य तेलों के दाम में भारी गिरावट आई है और किसान नीचे भाव में बिकवाली से बचने के लिए मंडियों में कम उपज ला रहे हैं। वर्तमान में खुदरा बाजार में सरसों तेल के दाम 115 से 120 रुपए व सोयाबीन तेल के दाम 100 से 105 रुपए लीटर बिक रहा है।

मस्टर्ड ऑयल प्रोड्यूसर्स एसोसियेशन ऑफ इंडिया याानि मोपा के क्रॉप कमेटी के चेयरमैन अनिल चतर का कहना है कि असमंजस के बीच केवल मजबूरी में थोड़ी बहुत मात्रा में जरूरतमंद किसान बिकवाली कर रहे हैं। हालांकि, आयातित तेलों के दाम टूटने की वजह से सरसों किसान भारी दबाव में हैं, क्योंकि उनका माल खप नहीं रहा है। पिछले साल सरसों का न्यूनतम समर्थन मूल्य 5050 रुपए क्विंटल था और किसानों को बाजार से अपनी उपज के लिए 7000 के लगभग दाम मिले थे। लेकिन, इस बार सरसों का एमएसपी 5450 रुपए क्विंटल है, लेकिन बाजार में किसानों को हाल ही में 4600 से 4700 रुपए क्विंटल के दाम मिले हैं।

अगले महीने मूंगफली की गर्मी की फसल आने वाली है। बाकी खाद्य तेलों के मुकाबले मूंगफली तेल के महंगा होने और खुदरा में दाम ऊंचा होने के कारण यह तेल बाजार में खप नहीं रहा है जिसकी वजह से समीक्षाधीन सप्ताह में मूंगफली तेल-तिलहन में गिरावट है।

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