पंजाब में आगामी चुनावों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने राज्य में भारतीय जनता पार्टी के चुनाव प्रचार अभियान की शुरुआत की। मोगा जिले के किल्ली चहला गांव में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कई अहम घोषणाएं कीं और राज्य की मौजूदा सरकार पर तीखा हमला बोला। सभा के दौरान अमित शाह ने कहा कि अगर पंजाब में भाजपा की सरकार बनती है तो सबसे पहला कानून धर्म परिवर्तन को रोकने से संबंधित लाया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि इस कानून का उद्देश्य राज्य में जबरन या लालच देकर किए जाने वाले धर्म परिवर्तन पर रोक लगाना होगा।
दो साल में नशामुक्त पंजाब का वादा
अमित शाह ने अपने संबोधन में पंजाब में बढ़ती नशे की समस्या का जिक्र करते हुए कहा कि भाजपा सरकार बनने के बाद दो साल के भीतर राज्य को नशे की समस्या से काफी हद तक मुक्त कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि भाजपा इस मुद्दे को गंभीरता से लेती है और इसके लिए ठोस योजना के साथ काम करेगी।
केंद्र सरकार के पुराने वादों का भी किया जिक्र
अपने भाषण में अमित शाह ने केंद्र सरकार की कुछ प्रमुख उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भाजपा ने पहले देश से Article 370 हटाने का वादा किया था, जिसे पूरा किया गया। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि देश में नक्सलवाद को खत्म करने की दिशा में भी काफी प्रगति हुई है और अब यह समस्या केवल सात जिलों तक सीमित रह गई है। उनका कहना था कि जल्द ही वहां से भी नक्सलवाद पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।
पंजाब सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप
सभा में बोलते हुए अमित शाह ने पंजाब की मौजूदा आम आदमी पार्टी सरकार की आलोचना भी की। उन्होंने राज्य की सरकार पर भ्रष्टाचार में लिप्त होने का आरोप लगाया और कहा कि प्रदेश में शासन व्यवस्था कमजोर हो गई है। उन्होंने पंजाब के मुख्यमंत्री Bhagwant Mann और आम आदमी पार्टी के प्रमुख Arvind Kejriwal का नाम लेते हुए कहा कि राज्य की नीतियों और फैसलों पर दिल्ली का ज्यादा प्रभाव दिखाई देता है। उनके अनुसार पंजाब की सरकार स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर पा रही है। अमित शाह ने यह भी आरोप लगाया कि दिल्ली से आए कुछ नेता पंजाब के प्रशासन में दखल दे रहे हैं और राज्य के संसाधनों का गलत इस्तेमाल हो रहा है।
चुनावी माहौल हुआ गर्म
अमित शाह की इस रैली के बाद पंजाब की राजनीति में चुनावी माहौल और गर्म हो गया है। आने वाले दिनों में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं की रैलियों और घोषणाओं के चलते राज्य में चुनावी गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।
