भारत में हाई-स्पीड सैटेलाइट इंटरनेट का इंतजार अब खत्म होने वाला है। एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक को भारत के स्पेस रेगुलेटर इंडियन नेशनल स्पेस ऑथराइजेशन एंड प्रोमोशन सेंटर (INSPACe) से देश में सैटेलाइट-बेस्ड इंटरनेट सर्विस शुरू करने का आधिकारिक लाइसेंस मिल गया है। इस मंजूरी के साथ स्टारलिंक भारत में अपनी सेवाएं देना शुरू कर देगा जिससे दूरदराज के इलाकों में भी इंटरनेट कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है।

5 साल के लिए मिली मंजूरी

INSPACe की वेबसाइट के अनुसार स्टारलिंक सैटेलाइट कम्युनिकेशंस को भारत में अपने स्टारलिंक जेन1 (Gen1) कॉन्स्टेलेशन की कैपेसिटी का इस्तेमाल करने की मंजूरी दी गई है। यह लाइसेंस पांच साल तक के लिए वैध होगा। बता दें कि स्टारलिंक के जेन1 नेटवर्क में 4,408 सैटेलाइट्स शामिल हैं जो 540 से 570 किलोमीटर की ऊंचाई पर पृथ्वी की परिक्रमा करते हैं। उम्मीद है कि यह भारत में लगभग 600 Gbps की स्पीड से इंटरनेट प्रदान करेगा।

लंबे इंतजार के बाद मिली लाइसेंस की मंजूरी

स्टारलिंक साल 2022 से भारत में लाइसेंस मिलने का इंतजार कर रही थी ताकि वह यहां अपना कमर्शियल ऑपरेशन शुरू कर सके। पिछले महीने ही स्टारलिंक को टेलीकॉम डिपॉर्टमेंट (DoT) से भी ज़रूरी लाइसेंस मिल गया था। अब बस स्पेक्ट्रम अलॉटमेंट फीस और टेलीकॉम डिपार्टमेंट के नियमों को अंतिम रूप देना बाकी है।

TRAI का सुझाव और कंपनियों की फीस पर बहस

टेलीकॉम रेगुलेटर ट्राई (TRAI) ने सुझाव दिया है कि स्टारलिंक जैसी सैटेलाइट इंटरनेट सर्विसेज देने वाली कंपनियों को अपनी होने वाली कमाई का 4 प्रतिशत सरकार को फीस के रूप में देना चाहिए। हालांकि यह फीस कंपनियों की उम्मीदों से कहीं ज़्यादा है। इस फीस मॉडल के तहत शहरों में सेवाएं देने वाली कंपनियों को प्रति ग्राहक 500 रुपये की फीस देनी होगी जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा।

जियो और एयरटेल से साझेदारी, घर-घर पहुंचेगी सर्विस

एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में भारत की दो बड़ी टेलीकॉम कंपनियाँ, जियो और एयरटेल ने अपने स्टोर्स में स्टारलिंक इक्विपमेंट्स बेचने के लिए स्पेसएक्स (SpaceX) के साथ साझेदारी की है। इस साझेदारी का मकसद भारत में स्टारलिंक की सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस को घर-घर तक पहुंचाना है।

इसके अलावा जियो और एयरटेल स्टारलिंक यूजर्स को इंस्टॉलेशन, एक्टिवेशन और कस्टमर सर्विस सपोर्ट की भी सुविधा देंगे। इस पार्टनरशिप से खासतौर पर उन क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी में सुधार लाने में मदद मिलेगी जहाँ ब्रॉडबैंड उपलब्ध नहीं है जैसे कि ग्रामीण क्षेत्र, पहाड़ी इलाके और जंगल।

इस कदम से भारत के डिजिटल परिदृश्य में एक बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है खासकर उन दूरस्थ क्षेत्रों में जहाँ पारंपरिक ब्रॉडबैंड पहुंचना मुश्किल है। 

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