ईडी की कार्रवाई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गए झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को कोई राहत नहीं मिली है।

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को कथित भूमि घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा गिरफ्तारी को चुनौती देने के लिए झारखंड हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाने को कहा।

हेमंत सोरेन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और ईडी की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू ने पक्ष रखा।

न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली एक विशेष पीठ ने सोरेन द्वारा सीधे शीर्ष अदालत में दायर याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए कहा, “हाई कोर्ट जाइए। हम इस मामले को नहीं दखेंगे।”

पीठ ने आदेश दिया, “संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हम याचिकाकर्ता पर उच्च न्यायालय जाने का अधिकार खुला रखते हैं…याचिकाकर्ता के लिए यह भी खुला होगा कि वह याचिका को शीघ्र सूचीबद्ध करने और निपटाने की मांग करे।”

संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर अपनी याचिका में सोरेन ने आरोप लगाया कि ईडी के अधिकारियों ने लोकसभा चुनाव से पहले एक “सुनियोजित साजिश” के हिस्से के रूप में केंद्र सरकार के निर्देश पर अपनी शक्तियों का दुरुपयोग किया।

सोरेन ने 31 जनवरी को झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसपर एक फरवरी हाईकोर्ट के एक्टिंग चीफ न्यायाधीश जस्टिस एस चंद्रशेखर और जस्टिस अनुभा रावत चौधरी की बेंच में सुनवाई हुई थी। कोर्ट ने टेक्निकल आधार पर सोरेन को कोई राहत देने से इनकार कर दिया था।

बेंच ने कहा कि आपने प्रतिवादी (ईडी) को मामले की जानकारी नहीं दी है और न ही उन्हें नोटिस किया गया है।

सुनवाई के दौरान ही हेमंत सोरेन ने यह कहते हुए याचिका वापस ली थी कि सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की गई है। अब सोरेन को एक बार फिर हाईकोर्ट का रुख करना पड़ेगा।

हेमंत सोरेन को ईडी ने 31 जनवरी को आठ घंटे की पूछताछ के बाद रात करीब नौ बजे गिरफ्तार कर लिया था। वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में रांची के होटवार स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा में हैं।

सोरेन ने बुधवार को राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप दिया, जब ईडी उनसे पूछताछ कर रही थी। इसके बाद सोरेन को गिरफ्तार कर लिया गया।

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