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सुप्रीम कोर्ट के बाद अब पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के ताजा फैसले से आप सरकार को एक और बड़ा झटका लगा है, जिससे उसकी नीतियों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए है। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब के मुख्यमंत्री के हैलीकॉप्टर पर रिपोर्टिंग को लेकर पत्रकारों के खिलाफ जांच पर रोक लगा दी है।

हाईकोर्ट ने कानून के छात्रों, पत्रकारों और मीडिया पेशेवरों के खिलाफ आगे की जांच पर अगली तारीख तक रोक लगा दी है, जिन्होंने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के कथित तौरपर जुड़े हैलीकॉप्टर आवागमन से संबंधित एक समाचार प्रकाशित किया था। जस्टिस विनोद एस.भारद्वाज ने अभियुक्त द्वारा एफ.आई.आर. रद्द करने की मांग वाली याचिका पर भी नोटिस जारी किया। पीठ ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अतर्गत रिपोर्टिंग का अधिकार न्यायालयों के समक्ष विचार के लिए अक्सर उठाता रहा है। न्यायालय ने कहा कि केवल इसलिए कि कोई सार्वजनिक पद धारण करने वाला व्यक्ति आहत महसूस करता है, राज्य  की कार्रवाई को मापने का मापदंड नहीं होना चाहिए। न ही यह राज्य द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले दावों से प्रभावित होना चाहिए।

मापदंड हमेशा सामान्य विवेक और प्रत्यक्ष संबंध पर आधारित होना चाहिए। पीठ ने कहा कि यद्यपि इस न्यायालय का मानना है कि सोशल मीडिया के प्रभावकों और प्रिंट/ विजुअल मीडिया को पत्रकारिता की नैतिकता का पालन करना चाहिए, जो सत्य, सटीकता और स्वतंत्र, निष्पक्ष रिपोर्टिंग के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। याचिका के अनुसार याचिकाकर्त्ता ने सूचना के अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत एक आवेदन दायर किया था, जिसमें मार्च, 2022 से पंजाब सरकार द्वारा जैट, हवाई जहाज और हैलीकॉप्टर किराए पर लेने या चार्टर पर किए गए व्यय का विवरण मांगा गया था। मांगी गई जानकारी में यात्रा की तारीखें, गंतव्य और यात्रा करने वाले व्यक्तियों के नाम शामिल थे। अधिकारियों ने आर.टी.आई. अधिनियम की धारा 24 का हवाला देते हुए और गण्यमान्य व्यक्तियों की सुरक्षा संबंधी चिंताओं का जिक्र करते हुए आर.टी.आई. आवेदन को खारिज कर दिया।


लेख छपने पर दर्ज हुई थी एफ.आई.आर.
दिसम्बर, 2025 में जब पंजाब के मुख्यमंत्री कथित तौर पर देश से बाहर थे, कई हैलीकॉप्टर उड़ानें देखी गई, जिसके बाद एक पत्रकारिता मंच परइन उड़ानों का विस्तृत विवरण देते हुए 1 दिसम्बर, 2025 से आगे की घटनाओं का विवरण प्रकाशित किया गया। इसी प्रकाशन के आधार पर एफ आई आर दर्ज की गई। एफ आई आर. में आरोप लगाया गया कि याचिकाकर्ताओं ने उड़ान-ट्रैकिंग डाटा की गलत व्याख्या के आधार पर ‘विकृत, अपुष्ट और स्पष्ट रूप से गलत दावे प्रकाशित किए, जिससे एक भ्रामक कहानी गढ़ी गई जो मुख्यमंत्री से जुड़े एक हैलीकॉप्टर के अनधिकृत या संदिग्ध उपयोग का सुझाव देती है।यह आरोप लगाया गया कि सामग्री जानबूझकर गलत सूचना और भ्रामक जानकारी फैलाने के समान थी, जो जनता को गुमराह करने, संवैधानिक अधिकारियों में विश्वास को कम करने, सार्वजनिक व्यवस्था को बिगाड़ने और पंजाब जैसे संवेदनशील सीमावर्ती राज्य में प्रशासनिक सामंजस्य को प्रभावित करने में सक्षम थी। इस बात को ध्यान में रखते हुए कि प्रथम दृष्टया अपराध के घटित होने के लिए आवश्यक तत्वों के अस्तित्व से संबंधित मुद्दों को प्रदर्शित करना आवश्यक है, न्यायालय ने आगे की जांच पर रोक लगा दी है।

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