प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रमुख अमेरिकी टेक कंपनियों के सीईओ (CEOs) के साथ एक राउंडटेबल बैठक में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने भारत की विकास संभावनाओं पर जोर दिया और विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देने के लिए कई पहलों पर चर्चा की। यह बैठक रविवार को मोदी की तीन दिवसीय अमेरिका यात्रा के दूसरे चरण के दौरान लोटे न्यूयॉर्क पैलेस होटल में हुई।

पीएम मोदी की अमेरिकी टेक कंपनियों के सीईओ के साथ हुई बैठक में एआई, क्वांटम कंप्यूटिंग और सेमीकंडक्टर्स (AI, quantum computing and semiconductors) जैसी अत्याधुनिक तकनीकों पर काम करने वाली 15 प्रमुख अमेरिकी कंपनियों के सीईओ ने भाग लिया।
मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग द्वारा आयोजित इस राउंड टेबल सम्मेलन में गूगल के सुंदर पिचाई, एनवीडिया के जेनसन हुआंग और एडोबी के शांतनु नारायण जैसे प्रमुख सीईओ शामिल हुए।

बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “21वीं सदी तकनीक द्वारा संचालित है। ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है जो तकनीक से संचालित न हो…तकनीक और लोकतंत्र के बीच संतुल की आवश्यकता है क्योंकि लोकतांत्रिक मूल्यों और तकनीक का संगम मानव कल्याण की गारंटी देता है…तकनीक बिना लोकतंत्र संकट का माहौल बनाती है। भारत एक ऐसा देश है जिसमें बहुत सारी प्रतिभा, लोकतंत्र और बाजार हैं…”

प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा, “…पिछले साल जब मैं वाशिंगटन आया था, तो मैंने एक हाई-टेक हैंडशेक कार्यक्रम में भाग लिया और मुझे आप में से कुछ से मिलने का मौका मिला…आज, एक साल बाद, मुझे दुनिया के प्रमुख नवप्रवर्तकों के साथ बैठकर गर्व महसूस हो रहा है। भारत के प्रति ऊर्जा, उत्साह और विश्वास हमें बहुत खुशी देता है…आप सभी ने बहुत सारे सुझाव दिए और आपका अनुभव और सुझाव मेरे लिए बहुत मूल्यवान हैं…”

पीएम नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर इस बैठक के बारे में पोस्ट करते हुए लिखा, “न्यूयॉर्क में टेक सीईओ के साथ एक सफल राउंड टेबल बैठक हुई, जिसमें प्रौद्योगिकी, नवाचार और अन्य पहलुओं पर चर्चा की गई। मैंने इस क्षेत्र में भारत द्वारा की गई प्रगति को भी उजागर किया। भारत के प्रति अपार आशावाद देखकर मुझे खुशी हुई।”

विदेश मंत्रालय की प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि सम्मेलन के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि प्रौद्योगिकी सहयोग और महत्वपूर्ण एवं उभरती प्रौद्योगिकियों पर पहल (ICET) भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी के केंद्र में हैं। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि अपने तीसरे कार्यकाल में भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के लिए हर संभव प्रयास करेगा और कंपनियों को भारत की विकास गाथा का लाभ उठाने के लिए सहयोग और नवाचार करने के लिए प्रोत्साहित किया।

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