भारतीय विज्ञापन मानक परिषद (एएससीआई) ने मीडिया कंपनियों से बुधवार को कहा कि वे अपने सोशल मीडिया खातों पर साझा किए जाने वाले ‘पेड पोस्ट’ को चिन्हित करें।

विज्ञापन उद्योग के स्व-नियामक संगठन (एसआरओ) ने विज्ञापनों को संपादकीय सामग्री समझे जाने पर गहरी चिंता व्यक्त की है। परिणामस्वरूप, उसने ऐसे विज्ञापनों को प्रदर्शित होने से रोकने के लिए अपनी संहिता में एक प्रावधान जोड़ा है।

आधिकारिक बयान में कहा गया कि नए जोड़े गए खंड के तहत किसी भी मीडिया कंपनी द्वारा ‘पेड’ या प्रायोजित सामग्री के शुरू में ही यह स्पष्ट करना होगा, ताकि दर्शकों को पहले से पता चल जाए कि यह प्रचारात्मक प्रकृति का है। बयान में कहा गया, ‘‘ विज्ञापन’’, ‘‘साझेदारी’’, ‘‘मुफ्त उपहार’’, ‘‘प्रायोजित’’, ‘‘प्लेटफॉर्म डिस्क्लोजर टैग’’ और ‘‘ सहभागिता’’ स्वीकार्य चिह्न (लेबल) हैं।

उच्च संपादकीय विश्वसनीयता वाले मंचों पर भ्रामक या अघोषित प्रचार के बारे में उपभोक्ता शिकायतें मिली थीं जिसके कारण नया खंड शामिल किया गया।

एएससीआई की मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) एवं महासचिव मनीषा कपूर ने कहा, ‘‘ कई मीडिया संस्थान नियमित रूप से अपने सोशल मीडिया खातों पर संपादकीय सामग्री साझा करते हैं। हम देख रहे हैं कि ऐसे ‘पोस्ट’ में बिना किसी जानकारी या अस्पष्ट जानकारी वाले विज्ञापन भी आ रहे हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ मीडिया समाचारों और ‘फीचर’ की अखंडता एवं विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए यह महत्वपूर्ण है कि प्रायोजित या प्रचारित सामग्री को पहले से ही स्पष्ट कर दिया जाए।’’


कपूर ने कहा कि उपभोक्ताओं को शुरू से ही यह ‘‘जानने का अधिकार’’ है कि वे प्रायोजित या संपादकीय सामग्री किसे देख रहे हैं। 

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