श्रीराम चौक और नेहरू गार्डन के पास सिविल अस्पताल को जाती मेन सड़क और नगर निगम कार्यालय के ठीक सामने बुधवार को हुए सड़क जाम के मामले में ह्यूमन राइट्स काउंसिल (इंडिया) ने कड़ी आपत्ति जताई है। संस्था की ओर से नगर निगम कमिश्नर को शिकायत भेजी गई है, जिसकी कॉपी डिप्टी कमिश्नर जालंधर, पंजाब राज्य मानवाधिकार आयोग और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को भी भेजी गई है। शिकायत में कहा गया है कि दिन में एक राजनीतिक कार्यक्रम के कारण व्यस्त सड़क को पूरी तरह बंद कर दिया गया। यह कार्यक्रम सत्ताधारी आम आदमी पार्टी से जुड़े लोगों द्वारा आयोजित किया गया था।

सड़क बंद होने से आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। सबसे गंभीर बात यह रही कि एंबुलैंस और मरीजों को सिविल अस्पताल तक पहुंचने में दिक्कत हुई, जिससे आपातकालीन सेवाएं प्रभावित हुईं। संस्था के अनुसार अस्पताल में आने वाले मरीजों, उनके परिजनों और दवाइयां खरीदने पहुंचे लोगों को काफी परेशानी हुई। यह इलाका व्यावसायिक क्षेत्र होने के कारण दुकानदारों को भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा और ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। सूत्रों के मुताबिक कार्यक्रम के लिए सक्षम अधिकारी से औपचारिक अनुमति नहीं ली गई थी। मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से बताया गया कि मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों ने इसे “सरकारी कार्यक्रम” बताया और सुरक्षा के लिए पुलिस बल तैनात किया गया था। इससे सरकारी संसाधनों के राजनीतिक उपयोग और अनुमति प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं? ह्यूमन राइट्स काउंसिल (इंडिया) ने अपने पत्र में कहा है कि सार्वजनिक सड़क को अवरुद्ध करना और आपात सेवाओं में बाधा डालना कानूनन अपराध है।

यह कृत्य भारतीय न्याय संहिता, 2023 के प्रावधानों के तहत सार्वजनिक उपद्रव और जनजीवन को खतरे में डालने की श्रेणी में आता है। संस्था की राष्ट्रीय अध्यक्ष आरती राजपूत और राष्ट्रीय कार्यालय सचिव एडवोकेट किरणदीप पासी ने मांग की कि 18 फरवरी की घटना की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और आयोजकों की जवाबदेही तय की जाए तथा भविष्य में अस्पताल और संवेदनशील क्षेत्रों के आसपास ऐसे कार्यक्रमों की अनुमति न दी जाए। उन्होंने यह भी मांग की है कि सभी नागरिक समूहों को शांतिपूर्ण सभा के लिए समान रूप से अनुमति दी जाए और कानून का समान रूप से पालन सुनिश्चित किया जाए।

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