संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान दौसा सांसद मुरारी लाल मीणा ने कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए। उन्होंने निजीकरण को आरक्षण के लिए खतरा बताया और कहा कि ठेका प्रथा से सामाजिक न्याय की मूल भावना कमजोर हो रही है।

सरकार की नीतियों पर सवाल
सांसद मीणा ने सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि पूंजीवाद को बढ़ावा दिया जा रहा है, लेकिन नई नौकरियां नहीं सृजित हो रही हैं। सरकारी विभागों में 25% पद खाली पड़े हैं और नई भर्तियां नहीं हो रही हैं, जिससे युवा बेरोजगार हैं।

महाकुंभ हादसे पर सरकार की भूमिका पर उठाए सवाल
सांसद मीणा ने महाकुंभ हादसे को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि सरकार श्रद्धालुओं की संख्या तो गिन सकती है, लेकिन हादसे में घायल और मृतकों की सही जानकारी नहीं दे पा रही है।

किसानों और मजदूरों की समस्याएं
उन्होंने किसानों के हक की बात करते हुए कहा कि एमएसपी की कोई गारंटी नहीं है और फसल बीमा योजना में किसानों के साथ धोखा हो रहा है। मजदूरों की समस्याओं को उठाते हुए कहा कि मनरेगा में करोड़ों जॉब कार्ड कैंसिल कर दिए गए हैं और मजदूरी महंगाई के अनुपात में नहीं बढ़ रही है।

सांसद मीणा ने न्यायपालिका में भी आरक्षण लागू करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकारी क्षेत्रों में आरक्षण की व्यवस्था है, लेकिन न्यायपालिका में इसका पालन नहीं किया जाता, जिससे सामाजिक न्याय प्रभावित होता है।

सांसद निधि बढ़ाने या खत्म करने की मांग
उन्होंने सांसद निधि पर भी बड़ा बयान देते हुए कहा कि या तो इसे ₹40 करोड़ किया जाए या फिर पूरी तरह से समाप्त कर दिया जाए। उन्होंने कहा कि वर्तमान राशि से किसी पंचायत को ₹1 लाख भी नहीं मिल पाता, जिससे विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।

ERCP योजना को लागू करने की अपील
राजस्थान के लिए ईस्टर्न राजस्थान कैनाल प्रोजेक्ट (ERCP) को बेहद जरूरी बताते हुए सांसद मीणा ने केंद्र सरकार से इसे जल्द लागू करने की अपील की। उन्होंने कहा कि राजस्थान को अधिक पानी की आवश्यकता है और इस योजना को लागू करना राज्य के हित में होगा।

सांसद मीणा के इन मुद्दों पर चर्चा के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इन पर क्या कदम उठाती है।

 

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