आर्थिक मामलों के विभाग (डीईए) की अनुराधा ठाकुर ने कहा कि सरकार अमेरिका के भारतीय निर्यात पर लगाए गए 50 प्रतिशत शुल्क के असर को कम करने के लिए एक कार्य योजना पर काम कर रही है।

उन्होंने एक साक्षात्कार में कहा, ”कुछ ऐसे रोजगार प्रधान क्षेत्र हैं, जिनका अमेरिका को होने वाले निर्यात से संबंध है और वे कुछ हद तक प्रभावित हो सकते हैं।

सरकार इससे अच्छी तरह वाकिफ है और संभावित प्रभाव का आकलन कर रही है तथा समाधान की दिशा में भी काम चल रहा है।”

डीईए सचिव ने कहा कि सरकार ने घरेलू मांग को बढ़ावा देने के लिए कुछ कदम उठाए हैं और कुछ कदम उठाए जा रहे हैं, जिससे अमेरिकी शुल्क का असर झेल रही विनिर्माण इकाइयों को मदद मिल सकती है।

सरकार ने बजट में नई कर व्यवस्था के तहत 12 लाख रुपये तक की आय पर शून्य आयकर की घोषणा की थी, जिससे करदाताओं को काफी बचत होगी।

सरकार ने जीएसटी दरों को युक्तिसंगत बनाने के लिए सुधारों की भी घोषणा की है, जिससे कई वस्तुओं की कीमतों में कमी आने की उम्मीद है।

इसके अलावा, उम्मीद से बेहतर मानसून कृषि उत्पादन को बढ़ावा देगा और बदले में ग्रामीण मांग तेज होगी। 

ठाकुर ने भरोसा जताया कि सरकार बजट में निर्धारित 4.4 प्रतिशत के राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को प्राप्त करने की राह पर है। 

गौरतलब है कि केंद्र का राजकोषीय घाटा जुलाई के अंत में पूरे वर्ष के लक्ष्य के 29.9 प्रतिशत तक बढ़ गया। पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में यह बजट अनुमान (बीई) का केवल 17.2 प्रतिशत था।

उन्होंने कहा, ”कुल राजकोषीय घाटे के आंकड़ों के आधार पर, हमारा अब तक का आकलन यही है कि हम लक्ष्य हासिल कर लेंगे।”

उन्होंने जोर देकर कहा कि अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत बनी हुई है, और निजी उपभोग के आंकड़े भी सकारात्मक रुख दिखा रहे हैं।

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