लोकसभा चुनाव के बाद अब विधानसभा उपचुनाव के लिए एनडीए और इंडिया को परीक्षा पास करनी होगी। इसके लिए दोनों गठबंधनों में मंथन शुरू हो गया। उपचुनाव में भी राजनीतिक जानकार कांटे की टक्कर होने की संभावना व्यक्त कर रहे हैं। इन नौ सीटों में भाजपा के तीन सपा के कर निषाद और रालोद के एक-एक विधायक सांसद बन गए हैं। 6 माह के भीतर उपचुनाव होना है। ऐसे में दोनों गठबंधन दलों को एक बार फिर अपनी पूरी ताकत लगानी पड़ेगी। बीजेपी के एक एमएलसी भी सांसद बन गए हैं। सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव कन्नौज लोकसभा सीट से सांसद बन गए हैं। वह करहल विधानसभा सीट से विधायक थे। राजनीति के जानकारों का मानना है कि अब अखिलेश यादव केंद्र की राजनीति करेंगे। अलीगढ़ जिले के खैर विधानसभा सीट से अनूप बाल्मीकि हाथरस से सांसद चुने गए हैं। बीजेपी के गाजियाबाद विधायक डॉ. अतुल गर्ग वहीं से सांसद चुने गए हैं। ऐसे में पार्टी वहां से वैश्य उम्मीदवार उतारती है। अथवा किसी अन्य पर दांव लगाती है। यह बात अभी भविष्य के गर्त में छिपी हुई है। फूलपुर लोकसभा सीट से फूलपुर विधायक प्रवीण पटेल सांसद चुने गए हैं। मिर्जापुर जिले के मझवां से निषाद पार्टी के विधायक डॉ. विनोद बिंद अब भदोही से सांसद निर्वाचित हुए हैं। ऐसे में मझवां सीट निषाद पार्टी के खाते में रहेगी अथवा नहीं, इस पर चर्चा तेज हो गई है। मीरापुर के विधायक चंदन चौहान बिजनौर से सांसद चुने गए गए हैं। ऐसे में इस सीट पर भी निगाहें लगी हैं। यह सीट उपचुनाव में रालोद के खाते में रहेगी अथवा नई रणनीति अपनाई जाएगी। यह समय बताएगा। मुरादाबाद जिले के कुंदरकी से विधायक जियाउर रहमान बर्क संभल से सांसद चुने गए हैं। ऐसे में कुंदरकी सीट पर जियाउर रहमान के पिता मामलुक उर रहमान और यहां के पूर्व विधायक मोहम्मद रिजवान प्रबल दावेदार हैं। ऐसे में पार्टी के सामने इन सीटों पर समन्वय स्थापित करते हुए इन्हें जीतने की चुनौती है। इसी तरह मिल्कीपुर से विधायक अवधेश प्रसाद फैजाबाद से सांसद बने हैं। ऐसे में अब मिल्कीपुर से संभावित उम्मीदवार के तौर पर अवधेश प्रसाद के बेटे अमित प्रसाद को मौका मिलेगा। अथवा नई रणनीति अपनाई जाएगी। अमित पहले भी दावेदारी कर चुके हैं। इसी तरह कटेहरी से विधायक लालजी वर्मा अब अंबेडकरनगर से सांसद बन गए हैं। यहां से उनकी बेटी आंचल भी दावेदार है। कुर्मी बिरादरी के अन्य कई नेता भी जोर आजमाइश में लगे हैं। लोक निर्माण मंत्री जितिन प्रसाद विधान परिषद सदस्य हैं। वह पीलीभीत से सांसद चुने गए हैं। ऐसे में खाली होने वाली इस सीट पर भाजपा किसे मौका देगी, इस पर निगाहें लगी हैं।

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