शेयर बाजार के निवेशकों के लिए गुरुवार की सुबह किसी बुरे सपने से कम नहीं रही। जैसे ही घड़ी की सुइयों ने कारोबार शुरू होने का संकेत दिया, दलाल स्ट्रीट में हाहाकार मच गया। ग्लोबल मार्केट से मिल रहे निगेटिव संकेतों और मिडिल ईस्ट में सुलगती युद्ध की आग ने भारतीय निवेशकों के अरबों रुपये स्वाहा कर दिए। सेंसेक्स और निफ्टी, दोनों ही प्रमुख इंडेक्स ताश के पत्तों की तरह ढहते नजर आए।
युद्ध की तपिश और एलपीजी का संकट
बाजार की इस ऐतिहासिक गिरावट के पीछे केवल एक वजह नहीं है। इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने कच्चे तेल की सप्लाई चेन को हिलाकर रख दिया है। दुनिया भर में पैदा हुए तेल संकट और भारत के भीतर एलपीजी की किल्लत की खबरों ने आग में घी डालने का काम किया। निवेशकों को डर है कि अगर यह तनाव और बढ़ा, तो महंगाई का नया दौर शुरू हो सकता है, जिसका सीधा असर कंपनियों के मुनाफे पर पड़ेगा।
सेंसेक्स-निफ्टी का गोता और दिग्गज शेयरों का हाल
कारोबार की शुरुआत होते ही बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स करीब 978 अंकों की भारी गिरावट के साथ 75,871 के स्तर पर आ गिरा। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के निफ्टी का हाल भी कुछ ऐसा ही रहा, जो देखते ही देखते 275 अंक से ज्यादा टूटकर 23,556 के पास पहुंच गया। बाजार का मूड इतना खराब था कि जोमैटो, इंडिगो और आईसीआईसीआई बैंक जैसे दिग्गज शेयरों के भाव जमीन पर आ गए। हालांकि, इस भारी बिकवाली के बीच रिलायंस इंडस्ट्रीज का शेयर किसी मजबूत दीवार की तरह खड़ा रहा और शुरुआती दौर में हरे निशान में कारोबार करता दिखा।
चौतरफा बिकवाली से सहमे निवेशक
विदेशी बाजारों, खासकर अमेरिकी और एशियाई मार्केट से पहले ही गिरावट के संकेत मिल रहे थे। गिफ्ट निफ्टी भी सुबह से ही कमजोरी दिखा रहा था। बाजार खुलते ही स्थिति इतनी भयावह थी कि करीब 1597 कंपनियों के शेयर लाल निशान में डूब गए। केवल मुट्ठी भर शेयरों में ही कुछ बढ़त देखी गई, जबकि बाकी बाजार गिरावट की चपेट में रहा। कोटक महिंद्रा बैंक और इंटरग्लोब एविएशन जैसे बड़े नामों में आई गिरावट ने छोटे निवेशकों की चिंता को और बढ़ा दिया है।
