प्रयागराज प्रशासन अब ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को मनाने की कोशिश में जुट गया है. सूत्रों के अनुसार, प्रशासन अपनी गलतियों के लिए माफी मांगने को तैयार है. लखनऊ के बड़े अधिकारी इस मामले में मध्यस्थता कर रहे हैं और वे जल्द ही वाराणसी जाकर शंकराचार्य से मुलाकात करेंगे.

शंकराचार्य ने रखीं दो शर्तें

भले ही प्रशासन हाथ-पैर मार रहा हो लेकिन शंकराचार्य ने अपनी वापसी के लिए दो टूक शर्तें रख दी हैं. उनकी पहली शर्त है कि जिन जिम्मेदार अधिकारियों ने दुर्व्यवहार किया है वे सार्वजनिक रूप से माफी मांगें. दूसरी शर्त यह है कि संगम स्नान के दौरान चारों शंकराचार्यों के लिए जो तय प्रोटोकॉल होता है उसे पूरी तरह लागू किया जाए. शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी योगीराज सरकार ने इस बात की पुष्टि की है कि शासन के अधिकारियों ने उनसे संपर्क किया है और वे वाराणसी आने वाले हैं. अब गेंद पूरी तरह प्रशासन के पाले में है.

12 दिनों से धरने पर थे स्वामी

इस पूरे विवाद की जड़ 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन हुई एक घटना है. उस दिन संगम नोज तक पालकी ले जाने को लेकर पुलिस-प्रशासन और शंकराचार्य के शिष्यों के बीच तीखी बहस और टकराव हो गया था. प्रशासन ने शिष्यों पर बैरिकेडिंग तोड़ने का आरोप लगाया था जबकि शंकराचार्य का कहना था कि पुलिस ने उनके शिष्यों के साथ बदसलूकी की है. पालकी न ले जाने देने से नाराज शंकराचार्य पिछले 12 दिनों से अपने शिविर में धरने पर बैठे थे और फिर अचानक माघ मेला छोड़कर वाराणसी चले गए थे.

सम्मान के साथ होगी वापसी

शंकराचार्य का अचानक मेला छोड़कर वाराणसी चले जाना प्रशासन के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं था. उन्हें उम्मीद नहीं थी कि स्वामी जी इतनी नाराजगी में शिविर खाली कर देंगे. अब जब माघी पूर्णिमा का बड़ा स्नान करीब है तो सरकार कोई जोखिम नहीं लेना चाहती. अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि वे शंकराचार्य को पूरे सम्मान के साथ वापस लाएंगे और प्रोटोकॉल के तहत ही संगम स्नान कराया जाएगा. जल्द ही इस समझौते का आधिकारिक ऐलान हो सकता है जिसके बाद तीर्थराज प्रयाग में एक बार फिर संतों की रौनक बढ़ेगी.

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