कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने शनिवार को कहा कि विपक्ष शासित आठ राज्यों ने माल एवं सेवा कर (जीएसटी) की दरों और स्लैब की संख्या कम करने के प्रस्ताव का समर्थन किया है, लेकिन उनकी कुछ मांगें भी हैं।

केंद्र ने प्रस्ताव दिया है कि जीएसटी को पांच प्रतिशत और 18 प्रतिशत दर वाली दो स्तरीय कर संरचना बनाया जाए। इसके अलावा अहितकर और विलासिता वाली कुछ चुनिंदा वस्तुओं के लिए 40 प्रतिशत की दर प्रस्तावित की गई है।

रमेश ने एक्स पर पोस्ट किया, “विपक्ष शासित आठ राज्यों (कर्नाटक, केरल, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, झारखंड) ने बड़े पैमाने पर उपभोग की वस्तुओं के लिए जीएसटी दरों में कटौती और जीएसटी स्लैब की संख्या कम करने के प्रस्ताव का समर्थन किया है। हालांकि, उन्होंने इसके साथ कुछ महत्वपूर्ण मांगें भी रखी हैं।”

कांग्रेस नेता ने कहा कि विपक्ष शासित राज्यों की एक मांग यह भी कहा कि एक ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जो सुनिश्चित करे कि दरों में कटौती का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंच सके।

उन्होंने कहा, “वर्षों तक सभी राज्यों को मुआवज़ा दिया जाए, जिसमें 2024/25 को आधार वर्ष माना जाए, क्योंकि दरों में कटौती से राज्यों की राजस्व आय पर प्रतिकूल असर पड़ना तय है।”

रमेश के अनुसार, विपक्ष शासित राज्यों की मांग है कि ‘सिन गुड्स’ और विलासिता वस्तुओं पर प्रस्तावित 40 प्रतिशत से ऊपर अतिरिक्त शुल्क लगाए जाएं और उससे होने वाली पूरी आय राज्यों को हस्तांतरित की जाए क्योंकि वर्तमान में केंद्र सरकार अपनी कुल आय का लगभग 17-18 प्रतिशत विभिन्न उपकरों से प्राप्त करती है, जिन्हें राज्यों के साथ साझा नहीं किया जाता।

उन्होंने कहा, “इन मांगों को पूर्णतया उचित माना जा रहा है, और इन्हें हाल ही में केंद्रीय वित्त मंत्रालय के राष्ट्रीय लोक वित्त एवं नीति संस्थान द्वारा प्रकाशित शोध-पत्रों का भी समर्थन प्राप्त है।”

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