विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को कहा कि वैश्विक स्तर पर ‘शुल्क में अस्थिरता’ के कारण व्यापार गणनाएं प्रभावित हो रही हैं। जयशंकर ने यह बात शुल्क को लेकर वाशिंगटन की नीति के कारण उत्पन्न आर्थिक व्यवधानों की पृष्ठभूमि में कही।

जयशंकर ने एक कार्यक्रम में अपने संबोधन में भू-राजनीतिक परिदृश्य में हो रहे गहन परिवर्तनों के ‘रणनीतिक परिणामों’ पर विस्तार से चर्चा की, जिसमें वैश्विक विनिर्माण के एक तिहाई हिस्से का एक ही स्थान में स्थानांतरित होना भी शामिल है, उनका स्पष्ट संदर्भ चीन था।

उन्होंने कहा, ‘‘ अब वैश्विक परिदृश्य पर विचार करें और परिवर्तन की तीव्रता तथा उसके प्रभावों पर विचार करें। वैश्विक विनिर्माण का एक तिहाई हिस्सा एक ही स्थान में स्थानांतरित हो गया है, जिसके परिणाम आपूर्ति शृंखलाओं पर पड़ रहे हैं।’’

उन्होंने अमेरिका की शुल्क नीति का परोक्ष रूप से उल्लेख करते हुए कहा, ‘‘कई समाजों में वैश्वीकरण विरोधी भावनाएं बढ़ रही हैं। शुल्क में अस्थिरता के कारण व्यापार गणनाएं प्रभावित हो रही हैं।’’

जयशंकर ने यह संबोधन जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय अध्ययन विद्यालय द्वारा आयोजित प्रथम अरावली शिखर सम्मेलन में दिया।

शुल्क अस्थिरता पर विदेश मंत्री की टिप्पणी भारत और अमेरिका के मध्य संबंधों में गिरावट के बीच आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय वस्तुओं पर शुल्क दोगुना कर 50 प्रतिशत कर दिया है, जिसमें भारत द्वारा रूसी कच्चे तेल की खरीद के लिए 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क भी शामिल है।

उन्होंने कहा, ‘‘वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य में व्यापक बदलाव आया है, अमेरिका जीवाश्म ईंधन का एक प्रमुख निर्यातक और चीन नवीकरणीय ऊर्जा का एक प्रमुख निर्यातक बन गया है। डेटा के उपयोग और कृत्रिम मेधा के विकास पर कई प्रतिस्पर्धी मॉडल हैं, जो एक-दूसरे से टकरा रहे हैं।’’

उन्होंने कहा कि बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियां अपने आप में महत्वपूर्ण खिलाड़ी बन गए हैं। कनेक्टिविटी के नए रास्ते उभर रहे हैं, जिनमें से कुछ रणनीतिक उद्देश्यों के साथ हैं।

विदेश मंत्री ने प्रतिबंधों के इस्तेमाल, संपत्तियों की “जब्ती” और क्रिप्टो के आगमन को पूरी दुनिया के वित्त परिदृश्य को बदलने वाले तत्वों के रूप में सूचीबद्ध किया।

उन्होंने कहा, ‘‘दुर्लभ मृदा और महत्वपूर्ण खनिजों के लिए प्रतिस्पर्धा तीव्र हो गई है, जबकि प्रौद्योगिकी नियंत्रण और भी कड़े हो गए हैं।’’

जयशंकर ने कहा कि जहां अधिकांश देश इससे निपटने के लिए संघर्ष कर रहे हैं या अपने हितों की रक्षा में व्यस्त हैं, भारत को ऐसी अस्थिरता के बीच रणनीति बनानी होगी और आगे बढ़ना जारी रखना होगा।

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