कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद और एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। यह बिल संसद में पास हो चुका है। हालांकि, विपक्ष लगातार इसका विरोध कर रहा है। वहीं, इसको लेकर भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने कहा कि इस वक्फ बिल को लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सम्मान करते हुए पारित किया गया है। असदुद्दीन ओवैसी को अपनी बात रखने के लिए पर्याप्त समय मिला। उन्हें न्यायालय से भी निराशा मिल सकती है, क्योंकि वक्फ बिल गरीब मुसलमानों के लिए मोक्ष का साधन है। 

यह तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा अपने वोट बैंक को खुश करने के लिए लाए गए 2013 के संशोधन को सही करने का एक साधन है, जिसने गरीब मुसलमानों के अधिकारों का हनन करने के लिए वक्फ का दुरुपयोग किया था। बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि जब कोई लोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर लोकसभा में उचित चर्चा और मतदान के बाद लिए गए निर्णय पर सवाल उठाता है, तो क्या ऐसे लोगों को सदन में बैठने का अधिकार है? ऐसे लोग न्यायालय में जाकर सदन की गरिमा को धूमिल करते हैं। उनके जैसे संकीर्ण सोच वाले लोग, जो अपने हिसाब से निर्णय चाहते हैं, बार-बार विधायिका का अपमान करते हैं। वे लोकतंत्र में विश्वास नहीं करते हैं। वे संविधान विरोधी हैं।

वहीं, संसद में पारित वक्फ संशोधन विधेयक पर यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने महाराजगंज में कहा कि अब कोई भी वक्फ बोर्ड के नाम पर जमीन नहीं लूट सकेगा। सार्वजनिक संपत्ति और राजस्व भूमि का उपयोग अब स्कूल, कॉलेज, अस्पताल या गरीबों के लिए आवास बनाने के लिए किया जाएगा।  मैं इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को धन्यवाद देता हूं, क्योंकि उत्तर प्रदेश में भी वक्फ बोर्ड के नाम पर लाखों एकड़ जमीन पर अवैध कब्जा कर लिया गया था। यह कुछ लोगों के लिए लूट का जरिया बन गया था। अब इस लूट पर लगाम लगेगी।

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