इस साल भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर अमृतसिद्ध और सर्वार्थसिद्धि योग का अद्भुत संयोग बन रहा है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर कृतिका, भरणी और रोहिणी नक्षत्र पर्व को और भी खास बना रहा है। इसे लेकर भक्तों में खासा उत्साह है। भाद्रपद की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि यानी शनिवार को भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया जाएगा। पर्व को लेकर मंदिरों में विशेष तैयारियां प्रारंभ हो गई।

Janmashtami 2025: दही हांडी की तैयारी

मंदिरों को रंग-रोगन के साथ ही रंग-बिरंगी झालर लाइटों सुसज्जित किया जा रहा है। झांकियां भी तैयार की जा रही है। जगह-जगह दही-हांडी के आयोजन की तैयारी जोरों पर है। ज्योतिषाचार्य के अनुसार भाद्रपद की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के रोहिणी नक्षत्र में मध्यरात्रि को हुआ था।

ज्योतिषाचार्य ने बताया कि अष्टमी तिथि 15 अगस्त को मध्यरात्रि 11.48 से प्रारंभ हो रही है, जो 16 अगस्त की रात लगभग 9.34 बजे तक रहेगी। लेकिन रोहिणी नक्षत्र 17 अगस्त की सुबह 4.38 बजे लग रही है। अष्टमी तिथि और रोहिण नक्षत्र का मेल नहीं हो रहा है।

श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर अमृतसिद्ध और सर्वार्थसिद्धि योग का अद्भुत संयोग बन रहा है। इसलिए भगवान जन्मोत्सव पर श्रीकृष्ण की अराधना और व्रत रखना भक्तों के लिए अत्यंत ही लाभदायक होगा।

सप्तदेव मंदिर में तैयार की जा रही झांकियां

श्री सप्तदेव मंदिर में शनिवार को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव धूमधाम से मनाई जाएगी। भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की तैयारी में प्रबंधन जुट हुए हैं। झांकियों को मूर्तिकारों के द्वारा सजाया जा रहा है। मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न बाल लीलाओं पर आधारित झांकियां श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र रहेगा।

झांकियों में श्रीकृष्ण का कारावास में जन्म, वासुदेव द्वारा श्रीकृष्ण को नदी पार कराना, वकासुर का वध, कालिया नाग पर नृत्य, पर्वत को अपनी ऊगंली पर उठाना सहित अन्य झांकियां रहेगी। इस अवसर पर विभिन्न स्पर्धाएं आयोजित होंगी। शनिवार को दिनभर विभिन्न प्रतियोगिताएं, श्री श्याम भजन की प्रस्तुति, रात्रि 11 बजे से भव्य आतिशबाजी के साथ 12 बजे श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया जाएगा। पंडित घनश्याम मिश्रा ने बताया कि श्रीकृष्ण जन्मोत्सव १६ अगस्त को मनाई जाएगी।

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