भारतीय रेलवे ने ट्रेनों में होने वाली तस्करी पर लगाम लगाने और अपनी सुरक्षा व्यवस्था को और भी मजबूत बनाने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। अब देश के प्रमुख रेलवे स्टेशनों की सुरक्षा व्यवस्था निजी हाथों में सौंपने की तैयारी है। रेल मंत्रालय ने जानकारी दी है कि फिलहाल दो स्टेशनों पर ट्रायल के तौर पर यह व्यवस्था लागू की जा रही है। अगर यह प्रयोग सफल रहा, तो देश के अन्य बड़े और व्यस्त स्टेशनों पर भी इसे लागू किया जाएगा।

एयरपोर्ट जैसी होगी स्टेशनों पर सुरक्षा
रेलवे मंत्रालय के अनुसार, रेलवे पहले भी हाउसकीपिंग और कैटरिंग जैसी कई सुविधाओं को आउटसोर्स कर चुका है, जिसका फायदा यह हुआ है कि स्टेशन अब पहले से ज्यादा साफ-सुथरे दिखते हैं और यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं। इसी तर्ज पर अब सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी ऐसा ही प्रयोग किया जा रहा है।

रेलवे स्टेशनों पर अब एयरपोर्ट जैसी सुरक्षा व्यवस्था लागू करने की तैयारी है। जिस तरह एयरपोर्ट पर सामान को स्कैनर में ठीक से रखने के लिए निजी सुरक्षा गार्ड तैनात होते हैं, लेकिन स्कैनिंग मशीन में जांच करने के लिए CISF (केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल) का जवान तैनात होता है, ठीक उसी तरह रेलवे स्टेशन परिसरों के बाहर और स्कैनिंग मशीनों में सामान को सही तरीके से रखने के लिए निजी सुरक्षा गार्डों को आउटसोर्स किया जाएगा।

तस्करी रोकने में मिलेगी मदद, RPF का बढ़ेगा फोकस
रेल मंत्रालय ट्रेनों से मानव और ड्रग्स की तस्करी जैसे अपराधों को रोकने के लिए लगातार कदम उठा रहा है। हाल ही में मुंबई में 36 करोड़ रुपये की तस्करी पकड़ी गई थी। RPF (रेलवे सुरक्षा बल) भी लगातार तस्करी रोकने के लिए प्रयास कर रहा है। निजी गार्डों की सुरक्षा में तैनाती से RPF के जवानों को उन जगहों पर तैनात किया जाएगा, जहाँ सबसे ज़्यादा ज़रूरत है, जैसे कि ट्रेनों के अंदर या संवेदनशील स्थानों पर। निजी गार्डों की तैनाती ट्रेनों में लाइन लगवाने और अन्य बाहरी कामों के लिए की जाएगी, जिससे RPF अपने मुख्य कार्यों पर अधिक ध्यान दे सकेगा।

इन दो स्टेशनों पर पायलट प्रोजेक्ट शुरू
भारतीय रेलवे के अनुसार, अभी दो स्टेशनों पर सुरक्षा आउटसोर्स की जा रही है:
चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन
गोमतीनगर (लखनऊ) रेलवे स्टेशन
इनके परिणाम आने के बाद, रेल मंत्रालय देश के ऐसे अन्य स्टेशनों पर भी यह व्यवस्था लागू करने पर विचार करेगा, जहाँ पर रोज़ाना चलने वाले यात्रियों और ट्रेनों की संख्या बहुत अधिक है।

इन बड़े स्टेशनों पर भी लागू हो सकती है यह व्यवस्था
पायलट प्रोजेक्ट के सकारात्मक परिणाम आने के बाद, भविष्य में देश के कई बड़े और व्यस्त स्टेशनों पर भी यह सुरक्षा व्यवस्था लागू की जा सकती है। इनमें संभावित रूप से शामिल हैं:
दिल्ली, मुंबई, पटना, सूरत, अहमदाबाद, लखनऊ, भोपाल, बेंगलुरु, चेन्नई, प्रयागराज, कानपुर, 

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