अमेरिका के ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने बुधवार (24 सितंबर 2025) को भारत की तारीफों के पुल बांधे और कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका, नई दिल्ली के साथ ऊर्जा सहयोग (energy cooperation) को बढ़ाने के लिए उत्सुक है।

राइट ने जोर देकर कहा कि अमेरिका भारत को शुल्क लगाकर दंडित करना नहीं चाहता, बल्कि शांति चाहता है। और इसी प्रक्रिया में अमेरिका को उम्मीद है कि भारत रूसी तेल की खरीद बंद करेगा, क्योंकि अमेरिका के पास तेल उपलब्ध कराने के लिए कई सारे विकल्प मौजूद हैं।

भारत के साथ ऊर्जा सहयोग बढ़ाना चाहता है वॉशिंगटन

न्यूयॉर्क फ़ॉरेन प्रेस सेंटर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, राइट ने दोनों देशों के बीच सहयोग के क्षेत्रों पर प्रकाश डाला, जिनमें प्राकृतिक गैस, कोयला, परमाणु ऊर्जा, स्वच्छ खाना पकाने के ईंधन और लिक्विड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) शामिल हैं।

राइट ने कहा, “मैं भारत का बहुत बड़ा प्रशंसक हूं। हम भारत से प्यार करते हैं। हम भारत के साथ और अधिक ऊर्जा व्यापार, अधिक संवाद और आपसी सहयोग की उम्मीद करते हैं।” उन्होंने भारत को कई ऊर्जा क्षेत्रों (energy sectors) में एक “सितारा” बताया।

अपने ऑफिस के शुरुआती दिनों को याद करते हुए राइट ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा, “मेरे पद संभालने के शुरुआती समय का काफी हिस्सा भारत से जुड़ा रहा जो दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र, अमेरिका का शानदार दोस्त और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था वाला देश है। यह वास्तव में एक गतिशील समाज है, जिसकी ऊर्जा की मांग तेजी से बढ़ रही है क्योंकि लोग अपनी समृद्धि और अवसर बढ़ा रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा कि इस अनुभव ने उन्हें कई क्षेत्रों में भारत के साथ ऊर्जा व्यापार और सहयोग बढ़ाने के अपने विश्वास को और मजबूत किया।

अमेरिका ने भारत से कहा कि वे उनका तेल खरीदें

न्यूयॉर्क में बोलते हुए राइट, भारत के केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के उस बयान का जवाब दे रहे थे, जिसमें उन्होंने कहा था कि नई दिल्ली आने वाले सालों में कुछ ऊर्जा उत्पादों पर वॉशिंगटन के साथ अपने सहयोग का विस्तार करने की उम्मीद करती है। उसी बातचीत में राइट ने भारत को सामने आने वाली भू-राजनीतिक चुनौतियों, खासतौर पर यूक्रेन में चल रहे युद्ध के संदर्भ में, भी स्वीकार किया।

समाचार एजेंसी के एक सवाल के जवाब में भारत-रूस तेल व्यापार पर राइट ने कहा, “दुनिया में कई तेल निर्यातक हैं। भारत को रूस का तेल खरीदने की जरूरत नहीं है। भारत रूस का तेल इसलिए खरीदता है क्योंकि यह सस्ता है। कोई भी रूस का तेल खरीदना नहीं चाहता, उन्हें इसे छूट पर बेचना पड़ता है। भारत ने सस्ता तेल खरीदने के लिए यह समझौता करना चुना है लेकिन दूसरी तरफ देखें, भारत के ऐसा करने से पैसा उन लोगों के पास जा रहा है जो हर हफ्ते हजारों लोगों की हत्या कर रहे हैं।”

उन्होंने वैश्विक ऊर्जा व्यापार (global energy trade) को संघर्ष से जोड़ा और कहा कि प्रतिबंधित रूसी तेल चीन, भारत और तुर्की को निर्यात किया जा रहा है, जो बदले में रूस के युद्ध प्रयासों को फंड करता है। राइट ने कहा, “और यही समस्या है। यह झड़प इसी मुद्दे पर है। हम चाहते हैं कि यह युद्ध समाप्त हो। मुझे विश्वास है कि भारतीय भी यह युद्ध समाप्त करना चाहते हैं और हम भारत के साथ अपने ऊर्जा सहयोग का विस्तार करना चाहते हैं।”

उन्होंने नई दिल्ली से रूस से तेल आयात पर पुनर्विचार करने का आग्रह भी किया और कहा कि अमेरिका भारत को दंडित करने का इरादा नहीं रखता, बल्कि यूक्रेन में शांति स्थापित करना चाहता है। राइट ने कहा, “हम चाहते हैं कि भारत हमारे साथ मिलकर तेल खरीदे। आप पृथ्वी के हर देश से तेल खरीद सकते हैं, बस रूस का तेल नहीं। यही हमारी स्थिति है। अमेरिका के पास बेचने के लिए तेल है और बाकी सभी के पास है।”

ट्रंप का वैश्विक शांति पर जोर

रूस-यूक्रेन युद्ध पर चर्चा करते हुए राइट ने बातचीत को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शांति पर जोर की ओर मोड़ दिया और कहा, “जब मैं उनसे बात करता हूं, तो कोई भी विषय हो, शांति का सवाल उठता है। हम अपने संसाधनों और प्रभाव का इस्तेमाल कैसे कर सकते हैं ताकि शांति स्थापित हो सके?”

उन्होंने यूक्रेन में रूस के युद्ध को क्रूर बताया और दुहराया कि वॉशिंगटन का मकसद इस युद्ध को खत्म करना है, जबकि भारत के साथ व्यापार जारी रखने की प्रतिबद्धता भी बनी हुई है।

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