पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में आयोजित नौवें अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के साथ कथित प्रोटोकॉल उल्लंघन को लेकर सियासत तेज हो गई है। झारखंड के कई नेताओं ने इस घटना की कड़ी आलोचना करते हुए इसे राष्ट्रपति पद और आदिवासी समाज का अपमान बताया है।
“मुर्मु के साथ किया गया व्यवहार बेहद दुर्भाग्यपूर्ण”
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने शनिवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्य सरकार के व्यवहार को शर्मनाक बताया। उन्होंने कहा कि दार्जिलिंग में आयोजित नौवें अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के साथ किया गया व्यवहार बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है।
अर्जुन मुंडा ने भी इस घटना को संविधान का अपमान बताया
मरांडी ने अपने प्रेस बयान में कहा कि देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के प्रति इस तरह का रवैया प्रोटोकॉल का उल्लंघन है। इससे आदिवासी समाज की भावनाएं भी आहत हुई हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के शब्दों में जो पीड़ा और असहजता दिखाई दी, उसे पूरे देश ने महसूस किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता के अहंकार में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राष्ट्रपति पद की गरिमा को ठेस पहुंचाई है और संथाल आदिवासी समाज का भी अपमान किया है। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने भी इस घटना को संविधान का अपमान बताया है।
“मुर्मु के साथ ऐसा व्यवहार करना बेहद शर्मनाक”
आजसू पार्टी के अध्यक्ष सुदेश महतो ने भी इस मामले की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु देश की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति हैं और उनके साथ ऐसा व्यवहार करना बेहद शर्मनाक है। सुदेश महतो ने आरोप लगाया कि जब राष्ट्रपति नौवें अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन में शामिल होने दार्जिलिंग पहुंचीं, तब उनका स्वागत करने के लिए न तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मौजूद थीं और न ही कोई वरिष्ठ अधिकारी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति को प्रोटोकॉल के अनुसार सम्मान नहीं दिया गया, जो बेहद आपत्तिजनक है। आजसू पार्टी ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे राष्ट्रपति पद का अपमान बताया है।
