ओडिशा के पुरी में स्थित जगन्नाथ मंदिर में रथ यात्रा की तैयारियां जोर-शोर से जारी हैं। मंदिर प्रशासन ने रथ निर्माण के काम में लगे कारीगरों की तारीफ करते हुए बताया कि रथ यात्रा के लिए तीन रथों के निर्माण का कार्य तेजी से किया जा रहा है। पुरी में सोमवार को ‘भौंरी’ उत्सव मनाया गया। इस मौके पर श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) ने रथ निर्माण कार्य में लगे सेवकों की सराहना की। रथ निर्माण की यह परंपरा 30 अप्रैल को अक्षय तृतीया के दिन शुरू हुई थी।

एसजेटीए के सूत्रों के अनुसार इस वर्ष रथ निर्माण में 78 महाराणा सेवकों सहित लगभग 200 लोग लगे हुए हैं।

एसजेटीए के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी अरविंद पाधी ने कहा, “कोई भी देख सकता है कि किस तरह सेवक और अन्य सहयोगी मिलकर पारंपरिक ढंग से रथों का निर्माण कर रहे हैं। यह वास्तव में जगन्नाथ संस्कृति की अमूर्त विरासत का मूल स्वरूप है। पूरा कार्य अच्छी तरह से आगे बढ़ रहा है।”उन्होंने पुरी के राजा के महल के पास ‘रथ खला’ का दौरा किया जहां रथों का निर्माण किया जा रहा है।

‘भौंरी’ उत्सव के अवसर पर विशेष पूजा के बाद तीनों रथों के 26 पहियों को लकड़ी की धुरी पर चढ़ाया जाता है।

भगवान जगन्नाथ के प्रमुख नंदीघोष रथ के मुख्य बढ़ई बिजय महापात्र ने कहा, “तीन रथ- भगवान जगन्नाथ का नंदीघोष, भगवान बलभद्र का तालध्वज और देवी सुभद्रा का दर्पा दलन रथ खला पर अलग-अलग खड़े होते हैं।”

‘भौंरी’ उत्सव भगवान जगन्नाथ की ‘चंदन’ यात्रा के समापन का भी प्रतीक है।


एसजेटीए के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह पुरी का एक प्रमुख त्योहार है जिसके लिए पुलिस ने पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था की है।

इस साल वार्षिक रथ यात्रा 27 जून को आयोजित होने वाली है।

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