एनसीईआरटी की आठवीं कक्षा की सोशल साइंस की किताब नए विवाद में है. इस बार विवाद की वजह है किताब में छपा एक मानचित्र जिसमें राजस्थान के कई हिस्सों मराठा साम्राज्य के अधीन दिखाया गया है. इस नक्शे का राजस्थान में तीव्र विरोध हो रहा है और इसे ऐतिहासिक तथ्यों से परे बताया गया है.

इस नक्शे में राजस्थान की रियासतें जैसे मेवाड़, जैसलमेर, बूंदी, जयपुर और अन्य को मराठा साम्राज्य का हिस्सा दिखाया गया है. राजपूत समुदाय और राजस्थान के पूर्व राजघरानों ने इस नक्शे को गलत और इतिहास से हटकर बताया है. उनका तर्क है कि राजस्थान की ये रियासतें कभी मराठा शासन में नहीं थीं, और इसे उनके गौरवशाली इतिहास को मिटाने की साजिश माना गया है. 

NCERT की आठवीं कक्षा की इस किताब का नाम Exploring Society: India and Beyond है. इसके एक चैप्टर (Rise of the Marathas) में 18वीं सदी में मराठा साम्राज्य के विस्तार को दिखाया गया है. विवाद की जड़ इस चैप्टर का नक्शा है. 

NCERT के मानचित्र पर राजपूत समुदाय नाराज

इस नक्शे का विरोध करने में राजस्थान का राजपूत समुदाय पार्टी लाइन से हटकर एक जुट हो गया है. बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही दलों के राजपूत नेता इसका विरोध कर रहे हैं. 

जैसेलमेर के राज परिवार चैतन्य राज सिंह, राजसमंद से बीजेपी सांसद महिमा कुमार, उनके पति और नाथद्वार से बीजपी विधायक विश्वराज सिंह, कांग्रेस नेता प्रताप सिंह खचरियावास, कांग्रेस नेता भंवर जितेन्द्र सिंह जैसे नेताओं ने इस नक्शे का विरोध किया है. और इस नक्शे में सुधार की मांग की है. 

प्रताप सिंह खचरियावास ने कहा है कि NCERT 8वीं कक्षा की सामाजिक विज्ञान की किताब में मराठा साम्राज्य का नक्शा ऐतिहासिक रूप से बिल्कुल गलत है. नक्शे में पूरे राजस्थान पर मराठाओं का राज दर्शाया गया है. ऐसा कभी हुआ ही नहीं था मराठा कभी राजस्थान में घुस नहीं पाए थे. 

गलती ठीक करने के लिए तैयार 

वहीं इस विवाद पर एनसीईआरटी सामाजिक विज्ञान विभाग के प्रमुख और आईआईटी गांधीनगर में आर्कियोलॉजिकल विज्ञान के गेस्ट प्रोफेसर माइकल डैनिनो ने सफाई देते हुए कहा है कि यह नक्शा पुराने और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध स्रोतों पर आधारित है, लेकिन यदि गलती मिलेगी तो किताब में आवश्यक संशोधन किए जाएंगे. 

उन्होंने कहा, “हमने अपना नक्शा अकादमिक पुस्तकों में पहले प्रकाशित कई नक्शों के आधार पर बनाया है, जिन पर कभी कोई विवाद नहीं हुआ था. इसलिए अगर कोई त्रुटि थी तो वह उन्हीं स्रोतों में थी. हम त्रुटि सुधार के लिए तैयार हैं, लेकिन इसके लिए पहले धैर्यपूर्वक शोध की आवश्यकता है.”

डैनिनो ने जोर देकर कहा कि “साम्राज्य” को परिभाषित करना हमेशा सीधा-सादा नहीं होता. क्षेत्र प्रत्यक्ष शासन के अधीन हो सकते हैं, जागीरदार राज्यों के रूप में कर अदा कर सकते हैं, या समझौतों के ज़रिए आधिपत्य स्वीकार कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि ऐसी जटिलताओं को एक ही नक्शे में पूरी तरह से नहीं समेटा जा सकता, खासकर जब क्षेत्रीय नियंत्रण अक्सर अस्थिर हो. 

सीमा निर्धारित करना आसान नहीं

उन्होंने कहा, “यह शायद ही कभी समझा जाता है कि ऐसे ऐतिहासिक प्रश्न हमेशा इतने आसान या सीधे नहीं होते. उदाहरण के लिए, “साम्राज्य” के अंतर्गत क्षेत्रों को परिभाषित करने के कई तरीके हैं, वे प्रत्यक्ष शासन के अधीन हो सकते हैं, या जागीरदार राज्यों के रूप में कर अदा कर सकते हैं, या किसी समझौते के तहत आधिपत्य स्वीकार कर सकते हैं. भारतीय इतिहास में ऐसी सभी स्थितियां घटित हुई हैं. आखिरकार ये अकादमिक प्रश्न हैं जिन पर निष्पक्षता से विचार करने की आवश्यकता है. एक गर्म राजनीतिक माहौल निश्चित रूप से सही उत्तर खोजने में मदद नहीं करेगा.”

डैनिनो ने बताया कि मानचित्र मराठा काल के विशेषज्ञों के परामर्श से तैयार किया गया था और इतिहासकार जी.बी. मेहेंदले के शिवाजी: हिज लाइफ एंड टाइम्स और पब्लिक स्कूल्स हिस्टोरिकल एटलस जैसे सोर्स के आधार पर बनाया गया था. 

उन्होंने कहा इस अध्याय को मराठा काल के दो विशेषज्ञों के परामर्श से तैयार किया गया था. इस अध्याय में कहीं भी (ऊपर दिए गए मानचित्र सहित) जैसलमेर का उल्लेख नहीं है, इन मानचित्रों में न केवल सीधे शासित क्षेत्र शामिल थे, बल्कि कर देने वाले राज्य और विवादित क्षेत्र भी शामिल थे. राजस्थान के संदर्भ में ऐसी प्रथा एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका भी पालन करती है. 

पाठ्यपुस्तक तैयार करने के लिए मिली कम समय सीमा को स्वीकार करते हुए डैनिनो ने कहा कि राजपूत और मराठा साम्राज्य के सीमाओं की पुष्टि करने के लिए शोध कार्य जारी है. यदि कोई त्रुटि पाई जाती है तो भविष्य के संस्करणों के लिए एक संशोधित मानचित्र तैयार किया जाएगा. 

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