मिडिल ईस्ट में चल रही जंग अब केवल मिसाइलों और हवाई हमलों तक सीमित नहीं रह गई है। इसके पीछे खुफिया एजेंसियों की गतिविधियां भी तेजी से बढ़ती दिखाई दे रही हैं।   हाल की रिपोर्टों के अनुसार Turkey की खुफिया एजेंसी National Intelligence Organization (MIT) ने ब्रिटेन की खुफिया एजेंसी MI6 से सीरिया के राष्ट्रपति Ahmed al‑Sharaa की सुरक्षा बढ़ाने के लिए अधिक भूमिका निभाने का अनुरोध किया था। हालांकि तुर्की सरकार ने बाद में इस रिपोर्ट को खारिज करते हुए कहा कि MIT ने MI6 से ऐसी कोई मांग नहीं की है। इस मामले की गंभीरता पर पूर्व RAW एजेंट और NSG कमांडो लक्ष्मण सिंह बिष्ट उर्फ लकी बिष्ट ने भी अपने सोशल मीडिया अकाऊंट पर एक पोस्ट शेयर कर मिडिल ईस्ट जंग में खुफिया एजेंसियों के बड़े खेल की तरफ इशारा किया है।

इदलिब क्यों बना अंतरराष्ट्रीय संघर्ष का केंद्र
सीरिया का Idlib क्षेत्र लंबे समय से संघर्ष का सबसे संवेदनशील केंद्र रहा है।  यहीं से पिछले कई वर्षों से सीरियाई सरकारी बल,  ईरान समर्थित गुट, विद्रोही संगठन और कई अंतरराष्ट्रीय ताकतें एक-दूसरे से टकराती रही हैं। इदलिब को सीरियाई गृहयुद्ध का सबसे जटिल युद्धक्षेत्र माना जाता है। सूत्रों के अनुसार हाल के महीनों में  इस्लामिक स्टेट (ISIS) ने सीरिया में अपनी गतिविधियां बढ़ा दी हैं। रिपोर्टों में कहा गया है कि पिछले वर्ष अहमद अल-शरा पर पांच हत्या प्रयास किए गए। ISIS ने उन्हें अपना “सबसे बड़ा दुश्मन” घोषित किया । फरवरी में सुरक्षा बलों पर कई हमले हुए। इसी कारण उनकी सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय सहयोग की चर्चा तेज हो गई। बता दें कि सीरिया में पूर्व राष्ट्रपति Bashar al‑Assad की सत्ता गिरने के बाद भी देश पूरी तरह स्थिर नहीं हो पाया है। लगभग 14 वर्षों के गृहयुद्ध ने लाखों लोगों को शरणार्थी बना दिया, अर्थव्यवस्था को तबाह कर दिया और आतंकवादी संगठनों को फिर से उभरने का मौका दिया।

ईरान-इज़राइल-अमेरिका युद्ध का भी असर
इसी समय Iran, Israel और United States के बीच बढ़ते युद्ध ने पूरे मिडिल ईस्ट को अस्थिर बना दिया है। हाल में तेहरान में बड़े हवाई हमले हुए।  ईरान ने मिसाइल और ड्रोन हमलों से जवाब दिया। अमेरिका ने इज़राइल को बड़े पैमाने पर हथियार सहायता दी। इस टकराव के कारण सीरिया सहित पूरे क्षेत्र में सैन्य और खुफिया गतिविधियां दोनों तेज हो गई हैं। विशेषज्ञों के अनुसार मिडिल ईस्ट में दिख रही जंग का एक छिपा हुआ मोर्चा खुफिया एजेंसियों का भी है। यदि तुर्की-MI6 से जुड़ी रिपोर्टों में सच्चाई है, तो यह साफ संकेत देता है कि मिडिल ईस्ट का संघर्ष केवल सैन्य टकराव नहीं बल्कि राजनीतिक, खुफिया और रणनीतिक स्तर पर चल रही बहुस्तरीय लड़ाई बन चुका है।

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