जब एक भारतीय महिला ने सोशल मीडिया पर अंतिम बार अपनी पीड़ा दुनिया के सामने रखी, तो शायद ही किसी ने अंदाजा लगाया हो कि यह उसकी आखिरी पुकार होगी। 33 वर्षीय विपंचिका, जो केरल की रहने वाली थीं और शारजाह में एक ऑफिस क्लर्क के रूप में काम कर रही थीं, ने अपनी डेढ़ साल की मासूम बेटी के साथ आत्महत्या कर ली। लेकिन यह सिर्फ आत्महत्या नहीं थी — यह एक मजबूर महिला की बर्बादी की गाथा थी, जिसे पति और ससुरालवालों ने मार-मार कर तोड़ा, उससे जबरन अश्लील और अपमानजनक काम करवाए और अंत में अकेलेपन में धकेल दिया।

 कौन थीं विपंचिका?
केरल के कोल्लम की रहने वाली। 2018 में शारजाह गईं, एक प्रतिष्ठित कंपनी में क्लर्क की नौकरी मिली। 2020 में नितीश नामक व्यक्ति से शादी हुई। एक बेटी हुई, जिसे वह अकेले पाल रही थीं।

परिवार के मुताबिक, पति और ससुराल के लोग अक्सर शारीरिक रूप से मारते थे। उनसे जबरन ऐसा काम करवाने की कोशिश की गई जो “पोर्न जैसा” था। सारे पैसे, पासपोर्ट, पहचान-पत्र छीन लिए गए। बच्ची के जन्म के बाद पति ने साथ रहने से इंकार कर दिया। 

फेसबुक पर लिखा आख़िरी संदेश: उन्होंने मुझे इंसान नहीं समझा… मुझे बेइज्ज़त किया, गंदे काम के लिए मजबूर किया…” 8 जुलाई को शारजाह की एक रिहायशी बिल्डिंग में विपंचिका की लाश पंखे से लटकती मिली, और बगल में बेटी की दम घुटने से मौत हो चुकी थी। अनुमान लगाया जा रहा है कि पहले बेटी को मारा गया, फिर खुद ने जान दे दी। फोरेंसिक रिपोर्ट और पुलिस जांच जारी है, लेकिन शुरुआती निष्कर्षों से यह साफ़ है कि यह कोई सामान्य आत्महत्या नहीं, बल्कि एक सिस्टम की असफलता है।

विपंचिका की मां शैलजा ने भारत सरकार, केरल पुलिस और भारतीय दूतावास से अपील की है कि शव को जल्द भारत लाने की व्यवस्था हो नितीश और उसके परिवार के खिलाफ हत्या व शोषण का मुकदमा चलाया जाए। UAE पुलिस निष्पक्ष जांच करे और आरोपी को सजा मिले। 

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