पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और केंद्र सरकार से इस महान स्वतंत्रता सेनानी से जुड़े सभी शेष दस्तावेजों को सार्वजनिक करने की अपील की। बनर्जी ने कहा कि दशकों बीत जाने के बावजूद नेताजी के लापता होने का रहस्य अब तक अनसुलझा है।

मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “देशनायक नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर मैं उन्हें हार्दिक श्रद्धांजलि और नमन अर्पित करती हूं।” उन्होंने कहा, “यह हम सभी का दुर्भाग्य है कि नेताजी के लापता होने का रहस्य आज तक नहीं सुलझा है। 1945 के बाद उनके साथ क्या हुआ, यह हम नहीं जानते। यह सभी के लिए अत्यंत दुख की बात है।”

बनर्जी ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस से संबंधित सभी राज्य स्तरीय फाइलें बहुत पहले ही सार्वजनिक कर दी थीं। उन्होंने कहा, “मैं भारत सरकार से एक बार फिर अपील करती हूं कि नेताजी से संबंधित सभी जानकारियों को सार्वजनिक किया जाए।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि बोस बंगाल, भारत और पूरी दुनिया के लोगों की भावनाओं से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा, “लोगों ने उन्हें कभी भुलाया ही नहीं और कभी भूलेंगे भी नहीं।”

नेताजी के समावेशी भारत के विचार को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वह जानते थे कि यह देश सिर्फ हिंदुओं या मुसलमानों का नहीं है, बल्कि पुरुषों और महिलाओं, हिंदुओं, मुसलमानों, सिखों, ईसाइयों, पंजाबी, तमिल, गुजराती और बंगालियों सभी का है। उन्होंने बोस की आजाद हिंद फौज को धर्मनिरपेक्षता और भाईचारे का प्रतीक बताया।

बनर्जी ने कहा, “अगर हम वास्तव में नेताजी को सम्मान देना चाहते हैं, तो यह हमारा कर्तव्य है कि हम उनकी एकता, भाईचारे और सद्भाव के आदर्शों का पालन करें, चाहे जाति, धर्म या लैंगिक पहचान कुछ भी हो। हम सभी भारतीय हैं– यही हमारी पहचान है।”

बोस को सम्मान देने के लिए अपनी सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अलीपुर जेल में उन्हें जिस कोठरी में बंद किया गया था, उसकी मरम्मत कर दर्शनीय स्थल के रूप में जनता के लिए खोल दिया गया है। नेताजी पर प्रदर्शनियां आयोजित की गई हैं और उनकी पुस्तक ‘तरुण के स्वप्न’ कई भाषाओं में अनुवादित की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा, “नेताजी के सम्मान में हमने ‘तरुणेर स्वप्न’ नामक एक परियोजना भी शुरू की है, जिसके तहत सरकारी स्कूलों के 11वीं कक्षा के छात्रों को पढ़ाई जारी रखने में मदद के लिए मोबाइल फोन या टैबलेट खरीदने के लिए 10,000 रुपये दिए जाते हैं।

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