प्रदेश की नगर पालिका और नगर परिषदों के पार्षद अब अध्यक्ष को अविश्वास प्रस्ताव लाकर नहीं हटा सकेंगे। उन्हें सीधे जनता ही हटाएगी। इसके लिए सरकार ने मप्र नगरपालिका संशोधन अध्यादेश 2025 लागू कर दिया है। इसके अनुसार अध्यक्ष को हटाने के लिए कराए गए गुप्त मतदान में नपा क्षेत्र के कुल मतदाताओं में से आधे से ज्यादा बहुमत जरूरी होगा। अध्यक्ष को वापस बुलाने की प्रक्रिया भी पद संभालने के तीन साल तक शुरू नहीं हो सकेगी।

इतना ही नहीं, अध्यक्ष को वापस बुलाने की प्रक्रिया पूरे कार्यकाल में सिर्फ एक बार हो सकेगी। विधि एवं विधायी विभाग ने मप्र नगरपालिका संशोधन अध्यादेश 2025 का राजपत्र में प्रकाशन कर दिया है। अध्यादेश कैबिनेट में मंजूर होने के साथ 9 सितंबर को ही राजपत्र में प्रकाशन के लिए भेजा गया था।

वर्तमान में अविश्वास से जूझ रहे अध्यक्षों को भी राहत

अध्यादेश लागू होने के बाद वर्तमान में शिवपुरी समेत अन्य नगरीय निकायों में अविश्वास से जूझ रहे अध्यक्षों को राहत मिलेगी। इसके लागू होने से मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम 1961 के अविश्वास प्रस्ताव संबंधी प्रावधान निष्प्रभावी हो गए हैं। वहीं अध्यादेश के लागू रहने की अवधि में नपा अधिनियम में अध्यादेश के संशोधनों के अधीन रहते हुए ही प्रभावी होगा। खासतौर पर धारा 3 से 18 तक संशोधन ही प्रभावी होंगे। बता दें, अध्यादेश 6 माह तक लागू रहेगा। इस अवधि में विधानसभा में इस प्रस्ताव को पारित कराना जरूरी है।

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