जिले के आबू नगर इलाके में मंदिर-मकबरा विवाद के बाद प्रशासन ने विवादित भूमि की रिपोर्ट तैयार की है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक प्रशासन ने 75 पेज की रिपोर्ट तैयार की है। इसे बनाने में 2 ADM, 3 SDM, 2 तहसीलदार, 3 नायब और 12 लेखपाल टीम में शामिल की गई थी। रिपोर्ट में गाटा संख्या 753 का संपूर्ण ब्यौरा को लेकर कुछ  नेताओं की धड़कने बढ़ गई है। क्योंकि प्रशासने ने जमींदारी के समय के भी दस्तावेज भी जुटाए गए है। वर्तमान खतौनी में मकबरे के नाम से 11 बीघे जमीन दर्ज है। जबकि वक्फ बोर्ड के दस्तावेजों में मकबरा के पास है सिर्फ 15 बिस्वा जमीन है। कमिश्नर के जरिए रिपोर्ट जल्द ही मुख्यमंत्री तक जाएगी।

मकबरा परिसर में तोड़फोड़
आप को बता दें कि 11 अगस्त को दक्षिणपंथी समूहों ने मकबरा परिसर में घुसकर कुछ कब्रों को क्षतिग्रस्त कर दिया था। उन्होंने दावा किया कि यह एक हिंदू मंदिर स्थल है और उसमें पूजा करने की अनुमति दी जानी चाहिये। मकबरे के मुतवल्ली मोहम्मद नफीस ने कहा कि यह संरचना लगभग 500 साल पुरानी है और इसे सम्राट अकबर के पौत्र ने बनवाया था।

10 नामजद और 150 अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज
मकबरे में घुसकर तोड़फोड़ करने और झंडा लगाने के आरोप में स्थानीय चौकी प्रभारी की शिकायत पर पुलिस ने 10 नामजद और 150 अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। हालांकि अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। ‘तामेश्वर मंदिर मेला समिति’ के प्रमुख विजय शंकर शुक्ला ने दावा किया है कि जिस जगह पर आज मकबरा है वह पहले कभी ‘ठाकुर सिद्धपीठ मंदिर’ था।

अभी किसी की नहीं हुई गिरफ्तारी 
उन्होंने मकबरे में तोड़फोड़ किये जाने के मामले में दर्ज मुकदमा वापस लेने की मांग की। उन्होंने धमकी दी कि अगर हिंदू समुदाय के सदस्यों को गिरफ्तार किया गया तो बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।  मकबरा परिसर में तोड़फोड़ के इस सिलसिले में दर्ज रिपोर्ट में नामजद लोगों में धर्मेंद्र सिंह (बजरंग दल), अभिषेक शुक्ला (भाजपा), अजय सिंह (जिला पंचायत सदस्य), देवनाथ धाकड़ (भाजपा), विनय तिवारी (नगर पार्षद), पुष्पराज पटेल, ऋतिक पाल और प्रसून तिवारी (भाजपा), आशीष त्रिवेदी और पप्पू चौहान (समाजवादी पार्टी) शामिल हैं। 

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