चीन ने भारत को उर्वरकों और दुर्लभ मृदा खनिजों की आपूर्ति से जुड़े प्रतिबंधों में ढील देने पर सहमति जताई है। आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि विदेश मंत्री एस जयशंकर को उनके चीनी समकक्ष वांग यी ने इस मुद्दे पर हुई प्रगति से अवगत कराया। भारत की दो दिवसीय यात्रा पर आए वांग ने सोमवार को जयशंकर के साथ अपनी वार्ता के दौरान यह आासन दिया। सूत्रों ने बताया कि चीन ने भारत की तीन प्रमुख चिंताओं का समाधान करने का वादा किया है।

चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने विदेश मंत्री जयशंकर को आासन दिया कि भारत की उर्वरकों, दुर्लभ मृदा खनिजों और सुरंग खोदने वाली मशीनों की जरूरतों को चीन पूरा करेगा। जयशंकर ने सोमवार को बिना कोई विवरण दिए कहा था कि उन्होंने बैठक में ‘‘विशेषंिचताओं’’ का उल्लेख किया, जिन्हें उन्होंने पिछले महीने अपनी बींिजग यात्रा के दौरान भी उठाया था।

इस संबंध में दोनों पक्षों की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। दुर्लभ मृदा खनिजों को उच्च-स्तरीय तकनीकी उत्पादों, जैसे ईवी, ड्रोन और बैटरी स्टोरेज के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। चीन वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला में एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता रहा है।

भारत अपनी आर्थिक वृद्धि को गति देने के लिए दुर्लभ मृदा खनिजों की निरंतर आपूर्ति की उम्मीद कर रहा है। वैश्विक दुर्लभ मृदा खनन में चीन का लगभग 70 प्रतिशत योगदान है, जो इसे महत्वपूर्ण खनिजों की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता बनाता है। चीन 2023 तक भारत को भारी मात्रा में उर्वरक निर्यात करता था।

हालांकि, चीन ने पिछले साल कई देशों को आपूर्ति रोक दी थी। उसने जून में प्रतिबंध हटा लिए, लेकिन भारत को निर्यात फिर से शुरू करने के मानदंडों में ढ़ील नहीं दी। ऐसा पता चला है कि चीन ने भारत को सुरंग खोदने वाली मशीनों का निर्यात बंद कर दिया है।

पूर्वी लद्दाख सीमा विवाद के बाद भारत-चीन के बीच तनाव बढ़ गया था और दोनों पक्ष संबंधों को सुधारने के लिए नए सिरे से प्रयास कर रहे हैं।

बैठक में अपनी शुरूआती टिप्पणियों में विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि भारत और चीन को एक कठिन दौर के बाद संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए ‘‘स्पष्ट और रचनात्मक’’ दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। 

जयशंकर ने पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास सीमावर्ती क्षेत्रों में तनाव घटाने की प्रक्रिया को आगे बढाने पर भी जोर दिया। इस क्षेत्र में दोनों देशों की सेनाओं के बीच चार साल से अधिक समय तक गतिरोध बना रहा। साल 2020 में गलवान घाटी में झड़प के बाद भारत-चीन संबंधों में गंभीर तनाव आ गया था।

इसके मद्देनजर चीनी विदेश मंत्री की यात्रा को दोनों पड़ोसी देशों द्वारा संबंधों को बहाल करने प्रयासों के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है। चीनी विदेश मंत्री मुख्य रूप से एनएसए अजीत डोभाल के साथ सीमा मुद्दे पर विशेष प्रतिनिधि स्तर की वार्ता के एक नये दौर की बैठक के लिए भारत आए हैं।

विशेष प्रतिनिधि स्तर की वार्ता में दोनों पक्षों द्वारा एलएसी पर समग्र स्थिति की समीक्षा के अलावा विश्वास-बहाली के नये उपायों पर विचार-विमर्श किए जाने की उम्मीद है। 

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