वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम द्वारा 1984 के ऑपरेशन ब्लू स्टार को ‘गलत तरीका’ बताने और यह कहने कि इंदिरा गांधी ने इसकी कीमत अपनी जान देकर चुकाई, पर पार्टी के भीतर तीखी प्रतिक्रिया हुई है। कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, पार्टी नेतृत्व उनकी इस टिप्पणी से नाराज है।

राशिद अल्वी ने उठाए सवाल

चिदंबरम की टिप्पणी पर उनके ही पार्टी सहयोगी राशिद अल्वी ने सार्वजनिक रूप से सवाल उठाते हुए गंभीर आशंकाएं व्यक्त की हैं। अल्वी ने कहा कि चिदंबरम का बयान वही है जो भाजपा करती रही है, और उन्होंने चिदंबरम के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों के कारण उन पर किसी दबाव की आशंका जताई।

कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने कहा, ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार सही था या गलत, यह अलग बात है। लेकिन पी चिदंबरम को 50 साल बाद कांग्रेस पार्टी, यानी इंदिरा गांधी पर हमला करने और यह दावा करने की क्या जरूरत है कि उन्होंने गलत कदम उठाया? वह वही कर रहे हैं जो भाजपा और प्रधानमंत्री कर रहे हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है।’

अल्वी ने चिदंबरम पर निशाना साधते हुए कहा, ‘चिदंबरम जी द्वारा कांग्रेस पार्टी पर बार-बार किए जा रहे हमले कई संदेह और आशंकाएं पैदा कर रहे हैं। उनके खिलाफ आपराधिक मामले अभी भी लंबित हैं। मुझे आश्चर्य है कि क्या उन पर कांग्रेस पार्टी पर हमला जारी रखने का कोई दबाव है? मुझे समझ नहीं आ रहा कि पिछले 11 सालों में भाजपा की कमियों को उजागर करने के बजाय चिदंबरम ऐसा क्यों कर रहे हैं।’

कांग्रेस आलाकमान की नाराजगी

पार्टी के शीर्ष सूत्र ने चिदंबरम के बयान को ‘अनुचित’ बताया और कहा कि इससे पार्टी को शर्मिंदगी उठानी पड़ी है। ग्रैंड ओल्ड पार्टी के एक शीर्ष सूत्र ने कहा, ‘कांग्रेस आलाकमान से लेकर आम कार्यकर्ता तक, सभी परेशान हैं। कांग्रेस से सब कुछ पाने वाले एक वरिष्ठ नेता को सोच-समझकर बोलना चाहिए। बार-बार ऐसे बयान देना ठीक नहीं है जिससे पार्टी को शर्मिंदगी उठानी पड़े।’

चिदंबरम ने क्या कहा था?

चिदंबरम ने हिमाचल प्रदेश के कसौली में खुशवंत सिंह साहित्य महोत्सव में पत्रकार हरिंदर बावेजा की पुस्तक ‘दे विल शूट यू, मैडम: माई लाइफ थ्रू कॉन्फ्लिक्ट’ पर एक चर्चा के दौरान यह टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था, ‘वह (ब्लू स्टार) स्वर्ण मंदिर को पुनः प्राप्त कराने का गलत तरीका था। गांधी ने उस गलती की कीमत अपनी जान देकर चुकाई। यह सेना, पुलिस, खुफिया विभाग और सिविल सेवाओं का फैसला था। आप इसके लिए केवल श्रीमती गांधी को दोष नहीं दे सकते।’

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