छत्तीसगढ़ सरकार ने बस्तर अंचल से सशस्त्र नक्सलवाद को जड़ से मिटाने के लिए एक निर्णायक समयसीमा (Deadline) निर्धारित की है। मंगलवार को विधानसभा में गृह विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने घोषणा की कि राज्य से 31 मार्च 2026 तक सशस्त्र नक्सलवाद को समाप्त कर दिया जाएगा और इसके एक साल बाद, यानी 31 मार्च 2027 तक बस्तर में तैनात अधिकांश केंद्रीय बलों की वापसी सुनिश्चित की जाएगी।
शर्मा ने विधानसभा में अपने विभाग की अनुदान मांगों पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा, “मैं सदन को यह भी बताना चाहता हूं कि जब 31 मार्च 2026 को सशस्त्र नक्सलवाद के समापन की तिथि तय की गई, तब यह भी निर्णय लिया गया था कि 31 मार्च 2027 तक यहां तैनात केंद्रीय बलों की वापसी की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। कुछ बल उससे पहले भी वापस जा सकते हैं। बैठकों में इस बात पर सहमति बनी है कि 31 मार्च 2027 को हम एक निश्चित समय सीमा मानकर चलें, हालांकि इसमें थोड़ा आगे-पीछे हो सकता है।”
उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए पुलिस विभाग के मुख्य बजट में कुल 7,721.01 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। शर्मा ने बताया कि पुनर्वास करने वाले वामपंथी उग्रवादी नक्सली कैडर के पुनर्वास के लिए केंद्र की पुनर्वास नीति के तहत सावधि जमा और व्यावसायिक प्रशिक्षण के लिए 38 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि नक्सल प्रभावित जिलों में 15 नए थानों की स्थापना के लिए 975 नए पद सृजित किए जाएंगे।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि इसके साथ ही आठ पुलिस चौकियों को थानों में उन्नत करने के लिए 337 नए पद और कम बल स्वीकृत वाले 21 थानों में अतिरिक्त बल वृद्धि के लिए 870 नए पदों का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य की 16 जेलों में ‘प्रिजन कॉलिंग सिस्टम’ स्थापित करने के लिए 1.05 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे बंदी अपने परिजनों और अधिवक्ताओं से वॉयस या वीडियो कॉल के माध्यम से बात कर सकेंगे।
शर्मा ने कहा कि इससे पहले चर्चा में भाग लेते हुए पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल ने कहा कि हर कोई चाहता है कि नक्सलवाद समाप्त हो और क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित हो। उन्होंने कहा कि सरकार बार-बार दावा कर रही है कि 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद समाप्त हो जाएगा।
बघेल ने कहा, “31 मार्च में अब केवल 21 दिन शेष हैं। हमें उम्मीद है कि इसके बाद अर्धसैनिक बलों की वापसी की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।” उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि नक्सलवाद के समाप्त होने के बाद 31 मार्च को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर इसका जश्न मनाया जाना चाहिए और बस्तर के विकास का लाभ मुख्य रूप से स्थानीय लोगों को मिलना चाहिए।
बघेल ने चर्चा के बाद कटौती प्रस्ताव पर मत विभाजन की मांग की। कटौती प्रस्ताव बजट में पेश की गई अनुदान मांगों में से किसी विशेष मांग की राशि को कम करने के लिए लाया जाने वाला एक विधायी प्रक्रिया है। प्रस्ताव के विरोध में 37 और पक्ष में 24 मत पड़े, जिसके बाद कटौती प्रस्ताव निरस्त हो गया। इसके बाद सदन ने शर्मा के विभागों की अनुदान मांगों को मंजूरी दे दी।
