पश्चिम बंगाल बीजेपी में दिलीप घोष ने अमित शाह से मुलाकात के बाद पार्टी में हलचल मचा दी है। उन्होंने मंदिर-मस्जिद की राजनीति की चुनावी उपयोगिता पर सवाल उठाया है। उन्होंने हाल ही में पार्टी में शामिल हुए लोगों पर भी निशाना साधा है।
‘मंदिर बनवाकर नहीं जीत पाएंगी चुनाव’
गुरुवार को दिलीप घोष ने कहा कि मंदिर-मस्जिद के मुद्दे चुनावी नतीजों को प्रभावित नहीं करते हैं। उन्होंने 2024 में फैजाबाद लोकसभा सीट पर बीजेपी की हार का उदाहरण दिया, जहां राम मंदिर होने के बावजूद बीजेपी चुनाव हार गई थी। दिलीप घोष ने यह भी कहा कि यह मानना भी गलत होगा कि पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी मंदिर बनवाकर 2026 का विधानसभा चुनाव जीत सकती हैं। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए कहा कि बीजेपी में सभी कार्यकर्ता हैं। उन्होंने कहा कि हाल ही में शामिल हुए लोगों को अपनी पहचान साबित करनी होगी। इस बात को 2021 के विधानसभा चुनावों से पहले टीएमसी छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए लोगों पर तंज के तौर पर देखा गया।
दिलीप घोष तीन दिन खरगपुर में करेंगे प्रचार
दिलीप घोष ने राज्य बीजेपी अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य से मुलाकात की और शनिवार से खरगपुर में तीन दिन के लिए प्रचार करने की अनुमति मांगी। उन्होंने कहा कि वे 2026 के विधानसभा चुनावों में अपनी गृह सीट से चुनाव लड़ना चाहते हैं। उन्होंने खुलकर कहा कि उन्हें दरकिनार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ बेबुनियाद, एजेंडा-आधारित बातें फैलाई गईं और उन्हें अलग-थलग कर दिया गया। उन्होंने बताया कि मैंने केंद्रीय नेतृत्व को यह बात बता दी है। उन्होंने कहा मुझे खो जाने का डर नहीं है और उन पर भरोसा है।
बंगाल में बड़े नेताओंं के होंगे दौरे
जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जनवरी के तीसरे हफ्ते में उत्तर बंगाल में एक रैली कर सकते हैं। वहीं, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की महीने के अंत तक कोलकाता आने की उम्मीद है। केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष जेपी नड्डा भी 8 जनवरी को शहर का दौरा करने वाले हैं।
