उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है जो फर्जी पतों और दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट बनवाने का अवैध धंधा चला रहा था। पुलिस ने इस मामले में एक डाकिये समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया है।पुलिस उपायुक्त (ग्रामीण क्षेत्र) सुरेंद्रनाथ तिवारी ने रविवार को बताया कि यह मामला तब सामने आया जब पिछले साल दिसंबर में क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी ने पुलिस को एक पत्र लिखकर संदिग्ध आवेदनों के बारे में बताया, जिनमें एक ही पते पर कई पासपोर्ट जारी किए गए थे और एक ही मोबाइल नंबर का बार-बार इस्तेमाल किया गया था।
तिवारी ने बताया कि जांच में पता चला कि आवेदक पासपोर्ट आवेदनों में बताए गए पतों पर नहीं रहते थे। तिवारी ने बताया कि इस मामले में एक डाकिये और एक महिला सहित 26 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। तिवारी ने बताया कि इस मामले में अब तक डाकिये अरुण कुमार समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि अरुण कुमार इस गिरोह के साथ मिला हुआ था और दस्तावेजों को बताए गए पतों पर पहुंचाने के बजाय सीधे गैंग के सदस्यों को देने के लिए प्रति पासपोर्ट दो हजार रुपये लेता था।

पुलिस ने बताया कि पूछताछ के दौरान अरुण कुमार ने पुलिस को बताया कि लगभग पांच महीने पहले प्रकाश सुब्बा और विवेक नाम के दो लोगों ने उससे संपर्क किया और कहा कि अगर वह उन्हें पासपोर्ट सौंपने के लिए सहमत होता है तो हर पासपोर्ट के लिए दो हजार रुपये मिलेंगे। तिवारी ने बताया कि खुफिया एजेंसियां ​​भी इस रैकेट के पीछे के बड़े नेटवर्क की जांच कर रही हैं। पुलिस ने बताया कि आगे की जांच की जा रही है।

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