पूर्व प्रधान न्यायाधीश सुशीला कार्की ने शुक्रवार रात नेपाल की पहली महिला प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। वह अंतरिम सरकार का नेतृत्व करेंगी।

इसके साथ ही नेपाल में कई दिनों से जारी राजनीतिक अनिश्चितता का अंत हो गया क्योंकि कथित भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया पर प्रतिबंधों के खिलाफ युवाओं के हिंसक प्रदर्शन के चलते मंगलवार को के पी शर्मा ओली को अचानक प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था।

राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने 73 वर्षीय कार्की को प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाई। 

नयी प्रधानमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में नेपाल के प्रधान न्यायाधीश, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, सुरक्षा प्रमुख और राजनयिक समुदाय के सदस्य शामिल हुए।

इससे पहले दिन में, राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल, नेपाल के शीर्ष सैन्य अधिकारियों और ‘जेन जेड’ के प्रतिनिधियों के बीच हुई बैठक के बाद कार्की को अंतरिम सरकार का नेतृत्व करने के लिए चुना गया।

सूत्रों ने बताया कि अपने मंत्रिमंडल की पहली बैठक में कार्की विभिन्न हितधारकों के बीच बनी सहमति के अनुसार राष्ट्रपति को संसद भंग करने की सिफारिश कर सकती हैं।

राष्ट्रपति पौडेल ने कार्यवाहक प्रधानमंत्री नियुक्त करने का फैसला करने से पहले प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं, कानूनी विशेषज्ञों और नागरिक संस्थाओं के सम्मानित व्यक्तियों से भी अलग-अलग विचार-विमर्श किया।

‘जेन जेड’ समूह द्वारा बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू करने के बाद प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली को इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा।

वर्ष 1997 से लेकर 2012 तक के बीच जन्में युवाओं को आम तौर पर ‘जेन जेड’ पीढ़ी के नाम से जाना जाता है।

प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में भ्रष्टाचार पर अंकुश, पक्षपात को समाप्त करना और सोशल मीडिया साइटों पर प्रतिबंध हटाना शामिल था।

इससे पहले शुक्रवार को नेपाल की प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष देवराज घिमिरे और ऊपरी सदन ‘राष्ट्रीय सभा’ के अध्यक्ष नारायण दाहाल ने शुक्रवार को आह्वान किया कि मौजूदा राजनीतिक गतिरोध को संविधान के दायरे में रह कर सुलझाया जाना चाहिए।

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घिमिरे और दाहाल के बीच बैठक के बाद जारी बयान में सभी पक्षों से प्रदर्शनकारियों की मांगों पर ध्यान देने और अधिक मजबूत, समृद्ध लोकतंत्र के लिए प्रतिबद्ध होने का आग्रह किया गया।

नेपाल में भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया मंचों पर प्रतिबंध के खिलाफ हाल में हुए ‘जेन जेड’ प्रदर्शन में एक भारतीय नागरिक सहित कम से कम 51 लोगों की मौत हुई है।

ओली के प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद नेपाली सेना ने सुरक्षा स्थिति को अपने नियंत्रण में ले लिया।

‘काठमांडू पोस्ट’ अखबार की खबर के अनुसार, नेपाल पुलिस के सह-प्रवक्ता वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रमेश थापा ने बताया कि हताहतों में एक भारतीय नागरिक और तीन पुलिसकर्मी शामिल हैं। 

नेपाल में छात्रों के नेतृत्व में हाल में हुए सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान देशभर में लगभग दो दर्जन होटल में तोड़फोड़, लूटपाट या आगजनी की घटनाएं दर्ज की गईं। इससे पर्यटन आधारित नेपाली अर्थव्यवस्था के राजस्व अर्जित करने वाले महत्वपूर्ण घटक होटल उद्योग को 25 अरब रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है।

समाचार पोर्टल ‘माई रिपब्लिका’ की खबर में होटल एसोसिएशन नेपाल (एचएएन) के हवाले से कहा गया है कि काठमांडू का हिल्टन होटल हिंसा से सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ, जहां आठ अरब रुपये से अधिक का नुकसान दर्ज किया गया है।

इसमें कहा गया है कि काठमांडू घाटी, पोखरा, बुटवल, भैरहवा, झापा, विराटनगर, धनगढ़ी, महोत्तरी और डांग-तुलसीपुर में अन्य प्रमुख घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय ब्रांड के होटल को भी हिंसा का खामियाजा भुगतना पड़ा है।

‘हिमालयन टाइम्स’ की खबर के अनुसार, आव्रजन अधिकारियों के अनुसार, जिन अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के वीजा आठ सितंबर तक वैध थे, वे अब बिना अतिरिक्त शुल्क दिए निकास परमिट प्राप्त कर सकते हैं और अपने वीजा को नियमित कर सकते हैं।

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