उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में भागवत कथा के दौरान जाति पूछने पर कथावाचक मुकुट मणि यादव और उनके सहायक संत यादव की पिटाई का विवादित मामला अब और उलझ गया है। दोनों कथावाचक अपने घरों से अचानक गायब हो गए हैं। जब जांच टीम उनके घर पहुंची, तो वहां ताले लगे मिले और दोनों के मोबाइल भी बंद थे। पड़ोसियों ने बताया कि घटना के बाद से ही दोनों कहीं नजर नहीं आए हैं।

क्या है पूरा मामला?
मुकुट मणि यादव और संत कुमार यादव इटावा के एक गांव में भागवत कथा पढ़ाने आए थे। पहले दिन की कथा खत्म होने के बाद ब्राह्मण समुदाय के कुछ लोगों ने उनसे उनकी जाति पूछी। जब उन्होंने खुद को यादव बताया, तो उनके साथ मारपीट की गई। आरोप है कि कथावाचकों की पिटाई के दौरान उनके बाल और चोटी काटे गए। इसके अलावा एक महिला को जबरन कथावाचकों ने पैर छूने को मजबूर किया और नाक रगड़वाई। पिटाई के दौरान कथावाचकों पर मूत्र छिड़कने का भी आरोप लगा है। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। पुलिस ने इस मामले में 4 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। वहीं, बाद में आरोपी महिला ने भी कथावाचकों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है।

फर्जी आधार कार्ड का खुलासा
जांच में सामने आया है कि दोनों कथावाचकों के 2-2 आधार कार्ड मिले हैं। लेकिन ये आधार कार्ड एक ही व्यक्ति के नाम और फोटो के साथ थे, सिर्फ नाम अलग था। ब्राह्मण समाज महासभा के प्रदेश अध्यक्ष अरुण दुबे ने आरोप लगाया कि ये दोनों कथावाचक फर्जी आधार कार्ड बनवाकर ब्राह्मण बनकर लोगों को गुमराह कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इन्हें फर्जी ब्राह्मण बताकर ही कथा पढ़ाने का मौका मिला था, लेकिन सच्चाई खुलने पर विवाद हुआ।

छेड़खानी का भी आरोप
पीड़ित महिला रेनू तिवारी ने बताया कि कथा के पहले दिन कथावाचकों ने उनसे छेड़खानी की। जब उन्होंने अपने पति को बताया, तो वहां मौजूद कुछ लोग भड़क गए और फिर पिटाई की घटना हुई। उन्होंने पुलिस को भी इसकी शिकायत की है।

झांसी पुलिस को सौंपी गई जांच
इस पूरे मामले की जांच झांसी पुलिस को सौंप दी गई है। झांसी के एसएसपी बीबीजीटीएस मूर्ति ने पूंछ थाना प्रभारी जेपी पाल को जांच का जिम्मा दिया है। जांच टीम इटावा पहुंचकर घटनास्थल और गांव का निरीक्षण कर रही है। ग्रामीणों से बयान भी लिए जा रहे हैं।

राजनीतिक विवाद भी छिड़ा
इस मामले में समाजवादी पार्टी ने कथावाचकों के साथ मारपीट की निंदा की है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कथावाचकों को पार्टी कार्यालय में सम्मानित किया और आर्थिक मदद भी दी। उन्होंने कहा कि भागवत कथा सबके लिए है और सबको सुनना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ ‘प्रभुत्वशाली’ लोग इस तरह की हरकतें कर रहे हैं, जिन्हें सरकार का संरक्षण प्राप्त है। अन्य राजनीतिक दलों ने भी इस मामले पर अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं, जिससे मामला और गर्मा गया है।

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