पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सोमवार को नई दिल्ली में भारतीय चुनाव आयोग (ECI) के मुख्यालय में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार से मुलाकात करेंगी. इस बैठक का मुख्य एजेंडा राज्य में चल रहा विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) होगा, जिसे लेकर तृणमूल कांग्रेस और राज्य सरकार ने गंभीर आपत्तियां जताई हैं.

मुख्यमंत्री की इस यात्रा के दौरान कई कार्यक्रम तय हैं, जिनमें SIR के मुद्दे पर चर्चा प्रमुख रहेगी. इसके साथ ही ममता बनर्जी विपक्षी दलों के वरिष्ठ नेताओं से भी मुलाकात कर सकती हैं ताकि इस पुनरीक्षण प्रक्रिया के खिलाफ एक साझा रणनीति और सहमति बनाई जा सके.
तृणमूल कांग्रेस के सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री ने जानबूझकर अपनी दिल्ली यात्रा का समय बजट सत्र के दौरान रखा है, क्योंकि इस दौरान अधिकांश विपक्षी दलों के शीर्ष नेता राजधानी में मौजूद रहते हैं. हालांकि, कोलकाता लौटने की तारीख अभी तय नहीं हुई है लेकिन पार्टी सूत्रों का कहना है कि ममता बनर्जी 5 फरवरी से पहले वापस आ जाएंगी क्योंकि उसी दिन पश्चिम बंगाल विधानसभा में ‘वोट ऑन अकाउंट’ पेश किया जाना है. बता दें, पश्चिम बंगाल विधानसभा का बजट सत्र भी राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है. सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस सदन में दो महत्वपूर्ण प्रस्ताव लाने की तैयारी में है. पहला प्रस्ताव राज्य में केंद्रीय जांच एजेंसियों-सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ED) की भूमिका की निंदा से जुड़ा होगा. दूसरा प्रस्ताव राज्य में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया और उसके संचालन के तरीके के विरोध में लाया जाएगा.

ममता ने CEC को लिखा था पत्र

मुख्यमंत्री और मुख्य चुनाव आयुक्त के बीच होने वाली बातचीत को लेकर सियासी हलकों में पहले से ही कड़े रुख के संकेत मिल रहे हैं. हाल ही में ममता बनर्जी ने CEC को एक तीखे शब्दों वाला पत्र लिखा था जिसमें उन्होंने विशेष रोल पर्यवेक्षकों (SROs) और माइक्रो-पर्यवेक्षकों की भूमिका और अधिकारों पर सवाल उठाए थे.

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अपने पत्र में मुख्यमंत्री ने दावा किया था कि केवल पश्चिम बंगाल में SIR की निगरानी के लिए SROs और माइक्रो-पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की गई है और उन्हें अनुमोदन प्राधिकरण के अधिकार भी दिए गए हैं. सीएम ममता ने आरोप लगाया था कि इससे चुनावी पंजीकरण अधिकारी (ERO) और सहायक चुनावी पंजीकरण अधिकारी (AERO) की भूमिका कमजोर हो गई है. ममता बनर्जी के अनुसार, पर्यवेक्षकों को दी गई अतिरिक्त शक्तियां भारतीय संविधान में निहित लोकतांत्रिक मूल्यों, संघवाद और मौलिक अधिकारों की भावना के खिलाफ हैं.

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