एक मामूली सी नाराजगी ने एक महिला की जान ले ली। वजह? उसका पति जेल में था और उसे यह बात नागवार गुजरी कि उसकी पत्नी उससे मिलने तक नहीं आई। जैसे ही वह रिहा हुआ, अपने भीतर पल रहे गुस्से को इस कदर हिंसक रूप दे दिया कि उसने पत्नी को घर के बाहर खींचकर पत्थर से मार डाला। अब, तीन साल बाद कोर्ट ने आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

जेल से लौटते ही उठा विवाद
मामला फरवरी 2020 का है। 34 वर्षीय मोहम्‍मद नसीम खलील अंसारी, जो 2019 में चोरी के आरोप में जेल भेजा गया था, 26 फरवरी 2020 को रिहा होकर अपने घर पहुंचा। घर में उसकी पत्नी यास्मीनबानो से कहासुनी हुई। आरोपी ने पत्नी को ताना मारा कि वह एक बार भी जेल में उससे मिलने नहीं आई। झगड़ा बढ़ा, तो एक पड़ोसी ने दखल देने की कोशिश की, लेकिन अंसारी ने उसे झिड़कते हुए बाहर निकाल दिया और खुद भी घर से चला गया।

आधी रात को लौटा और बरपाया कहर
रात को अंसारी फिर घर लौटा – लेकिन इस बार उसका गुस्सा हद पार कर गया। पुलिस के अनुसार, वह यास्मीनबानो से फिर भिड़ गया और मारपीट करने लगा। जान बचाने के लिए यास्मीनबानो घर से बाहर भागी, लेकिन अंसारी ने उसका पीछा किया। इसी अफरा-तफरी में पास खेल रहा एक पड़ोसी का बच्चा गिरकर घायल हो गया। जब उसके परिजन ने इसका विरोध किया, तो अंसारी ने उन्हें धमकाया और खुद भाग गया।

पत्थर से वार, फिर फरार – मौके पर ही दम तोड़ा
कुछ ही देर बाद, आरोपी फिर लौटा और पत्नी को बालों से पकड़कर घसीटते हुए सड़क पर लाया। वहां उसने उसके पेट में दो लातें मारीं, जिससे वह ज़मीन पर गिर गई। फिर पास पड़ा एक भारी पत्थर उठाकर उसने उस पर वार कर दिया और वहां से फरार हो गया। यास्मीनबानो को स्थानीय लोग अस्पताल लेकर गए, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी — डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

कोर्ट में चला ट्रायल, बचाव पक्ष की दलील खारिज
अंसारी ने अदालत में दावा किया कि उसकी पत्नी की मौत सड़क हादसे में हुई और वह उस वक्त घर पर मौजूद नहीं था। उसने यह भी कहा कि गवाह पड़ोसी का उससे पहले का निजी विवाद है और वह पुलिस का बार-बार इस्तेमाल किया जाने वाला ‘पेशेवर गवाह’ है। हालांकि, अदालत ने इन सभी दलीलों को खारिज कर दिया। जज एस. आर. नवंदर ने अपने फैसले में कहा कि: पड़ोसी की गवाही विश्वसनीय है और उसका कोई व्यक्तिगत स्वार्थ सामने नहीं आया। मेडिकल रिपोर्ट से साबित हुआ कि महिला की मौत दुर्घटना नहीं, बल्कि जानबूझकर किए गए हमले से हुई। घटना के समय की परिस्थिति, प्रत्यक्षदर्शियों की गवाही और सबूतों ने हत्या को पूरी तरह से साबित कर दिया।

अब जिंदगी भर जेल की सलाखों के पीछे रहेगा आरोपी
सेशन कोर्ट ने अंसारी को IPC की धारा 302 (हत्या) के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला एक बार फिर यह दिखाता है कि महिलाओं के खिलाफ घरेलू हिंसा या हत्या जैसे मामलों में अदालतें संवेदनशीलता के साथ सख्त रुख अपना रही हैं।

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