उत्तराखंड पुलिस के विशेष कार्यबल (STF) ने विभिन्न नामी कंपनियों की फर्जी दवाइयां बनाने वाली देहरादून की एक फैक्ट्री के मालिक को शुक्रवार को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने यह जानकारी दी। इसी के साथ ही अब तक इस संगठित गिरोह के सरगना समेत चार सदस्यों को गिरफ्तार किया जा चुका है। 

उत्तराखंड एसटीएफ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर ने बताया कि लंबे समय से फरार डॉ मित्तल लैबोरेटरीज फैक्टरी के मालिक देवी दयाल गुप्ता को देहरादून से गिरफ्तार किया गया जिसका आवास दिल्ली के अशोक विहार फेज दो में है। उन्होंने बताया कि एक जून को एक आरोपी संतोष कुमार को ग्लेनमार्क, इपका लैबोरेटरीज, इंटास फार्मा, एल्केम हेल्थ साइंस, डॉ रेडी लैबोरेटरीज, कैडिला फार्मास्यूटिकल आदि अनेक प्रतिष्ठित दवा कंपनियों के रैपर, लेबल एंव क्यूआर कोड के साथ देहरादून जिले के सेलाकुई क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया था। मामले की विवेचना के दौरान एसटीएफ ने गिरोह के सरगना नवीन बंसल तथा एक अन्य आरोपी आदित्य काला को भी गिरफ्तार किया था।  

लैबोरेटरीज में नकली दवाइयां तैयार करवाता था डॉ मित्तल
भुल्लर ने बताया कि बंसल से पूछताछ में जानकारी मिली थी कि वह देहरादून जिले के सहसपुर क्षेत्र में स्थित डॉ मित्तल लैबोरेटरीज में नकली दवाइयां तैयार करवाता था और उन्हें हरियाणा, राजस्थान एवं अन्य स्थानों में भिजवाता था। उन्होंने बताया कि जानकारी के आधार पर गुप्ता की तलाश शुरू की गयी लेकिन तब तक वह फरार हो गया था। एसएसपी ने बताया कि काफी तलाश के बाद गुप्ता को शुक्रवार को देहरादून से गिरफ्तार किया गया। 

एसटीएफ का कहना है कि गुप्ता अपनी फैक्टरी से बंसल को भारी मात्रा में नकली दवाइयां बनवाकर देता था। उसने 2021 से लेकर इस वर्ष मामला सामने आने तक लगभग एक करोड़ 42 लाख 30 हजार टैबलेट और लगभग दो लाख कैप्सूल अवैध तरीके से तैयार कर बंसल की फर्जी कंपनियों-रीलिन फार्माटेक एवं बी केम बायोटेक को दिए जो इन्हें जानी-मानी दवा कंपनियों के रैपर में पैक कर उत्तर भारत के विभिन्न शहरों में आपूर्ति करती थीं। आपूर्ति की जा रही नकली दवाइयों में पैंटोप्राजोल 40, डिक्लोसिन एसपी, लेवोसेट्रीजिन, प्रोक्लोरपेप्रीजिन, अल्मोडीपिन, टेलमीसरटन की टैबलेटस शामिल हैं । 

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