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दिल्ली आबकारी नीति से जुड़े  CBI मामले में रॉउज एवन्यू कोर्ट में सुनवाई के दौरान  आरोपी कुलदीप सिंह को अदालत ने बरी कर दिया. कोर्ट ने कहा कि उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं मिला. जज ने टिप्पणी की कि चार्जशीट में दर्ज गवाहों के बयान आपस में मेल नहीं खाते. विशेष रूप से गवाह संख्या 5 और 6 के बयानों में विरोधाभास पाया गया. अदालत ने यह भी कहा कि CBI द्वारा दिए गए दस्तावेज चार्जशीट से मेल नहीं खाते हैं.

सुनवाई के दौरान जज ने ‘साउथ ग्रुप’ और ‘साउथ लॉबी’ जैसे शब्दों के इस्तेमाल पर भी नाराजगी जताई. जज ने सवाल किया कि अगर यही चार्जशीट चेन्नई में दाखिल की जाती तो क्या वहां भी ‘साउथ ग्रुप’ लिखा जाता? यह शब्द किसने गढ़ा? इस पर CBI ने कहा कि यह कई आरोपियों के लिए साझा शब्द था. जज ने कहा कि अमेरिका में एक मामले को केवल इसलिए खारिज कर दिया गया था क्योंकि किसी समूह के लिए एक विशेष शब्द का इस्तेमाल किया गया था. अदालत की राय थी कि ‘साउथ ग्रुप’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए था.

कोर्ट ने यह भी कहा कि CBI ने चेन्नई की अदालत में दायर चार्जशीट में ‘साउथ लॉबी’ शब्द का इस्तेमाल किया था और पूछा कि यह शब्द कहां से आया. जज ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि अब तक उन्हें कन्फेशनल स्टेटमेंट की कॉपी उपलब्ध नहीं कराई गई. अदालत ने CBI के वकील से पूछा कि कन्फेशनल स्टेटमेंट जमा क्यों नहीं किया गया. इस पर CBI ने जवाब दिया कि वह सील कवर में जमा किया गया था. अदालत ने कहा कि पहले दिन से ही कन्फेशनल स्टेटमेंट की कॉपी मांगी जा रही थी. जज ने यह भी टिप्पणी की कि ‘कभी-कभी आप फाइल ज्यादा पढ़ते हैं तो फाइल आपसे बात करने लगती है.’ अंत में जज ने सभी वकीलों और एएसजी का धन्यवाद किया.

इससे पहले रॉउज एवन्यू कोर्ट में सुनवाई शुरू होते ही आरोपियों की हाजिरी ली गई. दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक अदालत पहुंचे और हाजिरी दी. के कविता, अमनदीप ढल समेत कई अन्य आरोपी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए. मामला दिल्ली आबकारी नीति से जुड़ा CBI का है, जिस पर अदालत में सुनवाई जारी है.

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