मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह का राज्यसभा कार्यकाल 9 अप्रैल को समाप्त होने जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, दिग्विजय सिंह ने स्पष्ट कर दिया है कि वे तीसरी बार राज्यसभा नहीं जाएंगे। उन्होंने पार्टी नेतृत्व को भी इस फैसले की जानकारी दे दी है। इसके साथ ही मध्य प्रदेश कांग्रेस की राजनीति में नई हलचल तेज हो गई है।

सूत्र बताते हैं कि 2028 में होने वाले विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए दिग्विजय सिंह अब पूरी तरह प्रदेश की राजनीति पर फोकस करना चाहते हैं। उन्होंने कांग्रेस आलाकमान से कहा है कि वे राज्य में रहकर संगठन को मजबूत करेंगे और मई से लेकर अगले ढाई साल तक चरणबद्ध तरीके से प्रदेश का दौरा करेंगे। इस दौरान वे बड़ी सभाओं के बजाय विधानसभा, ब्लॉक और बूथ स्तर पर छोटी बैठकों और कार्यकर्ता संवाद को प्राथमिकता देंगे। दिग्विजय सिंह के इस फैसले के बाद राज्यसभा सीट को लेकर कांग्रेस में अंदरूनी खींचतान शुरू हो गई है। अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने पार्टी को पत्र लिखकर राज्यसभा में अनुसूचित जाति वर्ग से प्रतिनिधित्व की मांग की है। उन्होंने सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप दलित नेतृत्व को अवसर देने पर जोर दिया है।

कमलनाथ का नाम चर्चा में, ये नेता भी रेस में…

इधर, दिग्विजय सिंह के राज्यसभा न जाने से खाली होने वाली सीट पर कई दिग्गज नेताओं की नजर है। इस रेस में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ, पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव, CWC सदस्य कमलेश्वर पटेल और पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन के नाम चर्चा में हैं। सूत्रों के अनुसार, कमलनाथ को मध्य प्रदेश से राज्यसभा भेजे जाने पर पार्टी में गंभीर मंथन चल रहा है। उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी जिम्मेदारी देने और केंद्र की राजनीति में सक्रिय भूमिका सौंपने की रणनीति पर भी विचार हो रहा है। दिग्विजय सिंह के फैसले के बाद कांग्रेस की राज्यसभा रणनीति और 2028 की तैयारी दोनों ही नए मोड़ पर पहुंच गई हैं।

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