नोएडा के सेक्टर 150 में 27 साल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज महतो की दर्दनाक मौत ने पूरे देश में हंगामा मचा दिया है। यह घटना 16-17 जनवरी 2026 की रात हुई, जब घने कोहरे में उनकी कार गहरे पानी भरे गड्ढे में गिर गई। युवराज करीब 90 मिनट तक पानी में डूबते-उतराते जिंदगी-मौत से जूझते रहे और “पापा मुझे बचा लो” चिल्लाते रहे, लेकिन बचाव में देरी के कारण उनकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण डूबना और दम घुटना बताया गया। इस केस में बिल्डरों की लापरवाही, पुलिस-प्रशासन की सुस्ती और खासकर गौतमबुद्ध नगर की डीएम मेघा रूपम पर सबसे ज्यादा सवाल उठ रहे हैं।

घटना का पूरा विवरण

16 जनवरी की रात युवराज अपनी एसयूवी चला रहे थे। सेक्टर 150 टी-पॉइंट के पास निर्माणाधीन प्लॉट में बेसमेंट के लिए खोदा गया गड्ढा पानी से भरा था। कोई बैरिकेडिंग या चेतावनी बोर्ड नहीं था। घने कोहरे के कारण कार सीधे नाले में गिर गई। युवराज कार से बाहर निकलने की कोशिश करते रहे, लेकिन पानी धिरे-धिरे उनकी कार को डूबाता गया। पुलिस और फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंचे, लेकिन प्रभावी बचाव नहीं हुआ। शव रविवार सुबह निकाला गया, जबकि कार चार दिन बाद (20 जनवरी को) NDRF की मदद से बाहर निकाली गई।

डीएम मेघा रूपम पर उठ रहे सवाल

गौतमबुद्ध नगर की जिलाधिकारी (डीएम) मेघा रूपम इस मामले में सबसे ज्यादा विवादों में हैं। वे जिला आपदा प्रबंधन समिति की अध्यक्ष भी हैं। घटना के 3-4 दिन बाद ही वे घटनास्थल पर पहुंचीं, जिसकी जमकर आलोचना हो रही है। लोग कह रहे हैं कि अगर समय पर पहुंचतीं, तो शायद युवराज की जान बच सकती थी। डीएम पर आरोप है कि वे चुप्पी साधे हुए हैं और सवालों से बच रही हैं। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि प्रशासन उन्हें बचाने की कोशिश कर रहा है। डीएम पर नेपोटिज्म के आरोप भी लग रहे हैं। सीएम योगी आदित्यनाथ ने मामले की संज्ञान लेते हुए SIT जांच के आदेश दिए हैं, जिसमें डीएम और अन्य अधिकारियों की भूमिका भी जांच होगी।

नोएडा के डिजास्टर मैनेजमेंट प्लान की असफलता

गौतमबुद्ध नगर का डिजास्टर मैनेजमेंट प्लान करीब 170 पेज का है, जो जिला प्रशासन की वेबसाइट पर उपलब्ध है। यह प्लान आपदाओं जैसे बाढ़, आग, भूकंप, औद्योगिक हादसे आदि से निपटने के लिए बनाया गया है। मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

जिला आपदा प्रबंधन समिति: डीएम अध्यक्ष होती हैं। इसमें पुलिस, फायर, स्वास्थ्य, NDRF आदि विभाग शामिल।
रिस्क आकलन: क्षेत्र में बाढ़, निर्माण हादसे, कोहरा जैसी समस्याओं का जिक्र।
बचाव और राहत: तुरंत रिस्पॉन्स टीम, संसाधन जैसे बोट, पंप, NDRF कॉर्डिनेशन।
प्रिवेंशन: निर्माण साइट्स पर सुरक्षा, बैरिकेडिंग, नाइट वॉच।
कम्युनिकेशन: अलर्ट सिस्टम, हेल्पलाइन, मीडिया कोऑर्डिनेशन।

लेकिन इस केस में प्लान पूरी तरह फेल साबित हुआ। गड्ढे पर कोई सुरक्षा नहीं थी, बचाव में देरी हुई, संसाधन समय पर नहीं पहुंचे। चार दिन में कार निकालने में भी मुश्किल आई, जबकि प्लान में तुरंत रिस्पॉन्स का प्रावधान है। इससे साफ है कि प्लान कागजों तक सीमित रह गया।

प्रशासन और बिल्डरों पर आरोप

पुलिस ने बिल्डर अभय कुमार समेत कई लोगों को गिरफ्तार किया। लोटस ग्रीन कंस्ट्रक्शन और विजटाउन प्लानर्स के खिलाफ FIR दर्ज हुई। आरोप है कि निर्माण साइट खुली छोड़ दी गई, कोई चेतावनी नहीं लगाई। प्रशासन पर आरोप है कि वे डीएम को बचाने में लगे हैं। युवराज के पिता ने कहा कि अगर समय पर मदद मिलती तो बेटा बच जाता। सोशल मीडिया पर #JusticeForYuvraj ट्रेंड कर रहा है। लोग कह रहे हैं कि नोएडा जैसे हाई-टेक शहर में ऐसी लापरवाही कबूल नहीं।

आगे क्या?

सीएम योगी ने SIT जांच का आदेश दिया है। इसमें लापरवाही बरतने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी। यह मामला निर्माण सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और प्रशासनिक जवाबदेही पर बड़ा सबक है। युवराज की मौत ने सिस्टम की कमजोरियों को उजागर कर दिया है। परिवार को न्याय मिलना चाहिए और ऐसे हादसे दोबारा न हों, इसके लिए सख्त कदम उठाने होंगे।

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