मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर अब साइबर अपराधियों के लिए केवल निशाना नहीं, बल्कि ठगी के संसाधनों की सबसे बड़ी ‘सप्लाई चेन’ बनकर उभर रही है। कॉल सेंटरों से शुरू हुआ साइबर अपराध का यह काला कारोबार अब टेलीग्राम के बंद कमरों और डिजिटल ग्रुप्स तक जा पहुंचा है। चौंकाने वाली बात यह है कि इन ग्रुप्स में ‘इंदौर लोकेशन’ वाले बैंक खातों की मांग सबसे अधिक है, जहां स्थानीय दलालों से लेकर सात समंदर पार बैठे ऑपरेटर तक सक्रिय हैं।

म्यूल बैंक खातों का मायाजाल: क्रिप्टो में हो रहा भुगतान 

जांच में सामने आया है कि टेलीग्राम पर ऐसे सैकड़ों ग्रुप्स सक्रिय हैं जिनमें हजारों सदस्य शामिल हैं। ये अपराधी ठगी की रकम को सुरक्षित ठिकाने लगाने के लिए ‘मनी म्यूल’ (किराए के खाते) का उपयोग कर रहे हैं। विदेशी ऑपरेटर इन भारतीय खातों के बदले USDT और अन्य क्रिप्टो करेंसी का लालच देकर सौदेबाजी कर रहे हैं। विशेष रूप से कॉर्पोरेट और करंट अकाउंट्स के लिए 50 हजार से 1 लाख रुपए तक की बोली लगाई जा रही है।

कैसे बुना जाता है ठगी का जाल? 

साइबर ठगों की कार्यप्रणाली बेहद शातिर है:

डिमांड पोस्ट: ग्रुप में विशिष्ट बैंक और कॉर्पोरेट अकाउंट की डिमांड डाली जाती है।

रिमोट एक्सेस: इच्छुक व्यक्ति से पासबुक की फोटो ली जाती है और उसे एक APK फाइल डाउनलोड करवाई जाती है, जिससे अपराधी खाते का पूर्ण डिजिटल नियंत्रण हासिल कर लेते हैं।

फिजिकल किट कलेक्शन: सौदा तय होने के बाद 24 घंटे के भीतर एजेंट भेजकर डेबिट कार्ड, चेकबुक और सिम कार्ड कलेक्ट कर लिए जाते हैं।

कमीशन का खेल: कई मामलों में खाते का उपयोग करने के बदले ठगी की राशि में 50-50 प्रतिशत की हिस्सेदारी तय होती है।

टेलीग्राम पर कोडवर्ड में डीलिंग 

इन ग्रुप्स में ‘क्लीन फंड’ और ‘गेमिंग फंड’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर ठगी के पैसे को खपाने की बात की जाती है। कुछ प्रमुख संदेशों के नमूने इस प्रकार हैं:

“अर्जेंट एक्सिस नियो कॉर्पोरेट खातों की जरूरत, फेस-टू-फेस डील होगी।”

“सेविंग अकाउंट उपलब्ध (वन टाइम सेल), बैंक ऑफ इंडिया, HDFC और BOB को प्राथमिकता।”

“सीधे कंपनी से जुड़ा हूं, बिचौलिया नहीं, गेमिंग फंड के लिए कॉर्पोरेट अकाउंट चाहिए।”

डिजिटल अरेस्ट कर 40 लाख ठगने वाली गैंग का गुर्गा गिरफ्तार 

इसी बीच, इंदौर क्राइम ब्रांच ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए 71 वर्षीय बुजुर्ग को ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर 40 लाख रुपए ठगने वाली अंतरराज्यीय गैंग के सदस्य पीयूष परमार (निवासी सूरत, गुजरात) को गिरफ्तार किया है। एडिशनल डीसीपी राजेश दंडोतिया के अनुसार, आरोपी पीयूष ने गैंग को बैंक खाते मुहैया कराने की बात स्वीकार की है। इससे पहले पुलिस इसी गिरोह के हिम्मतभाई देवानी और अतुल गिरि गोस्वामी को गिरफ्तार कर चुकी है। पुलिस अब पीयूष को रिमांड पर लेकर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि उसने अब तक कितने खाते ठगों को बेचे हैं और इस नेटवर्क के तार इंदौर के किन स्थानीय दलालों से जुड़े हैं।

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