वर्ष 2021 में सीमेंट कारोबारी श्याम सुंदर बंसल की गोली मारकर की गई क्रूर हत्या के मामले में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश जयबीर सिंह की अदालत ने सोमवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने कुल 11 आरोपियों को दोषी करार देते हुए आजीवन कठोर कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई है। साथ ही प्रत्येक दोषी पर कुल 75,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है। जुर्माना समय पर न चुकाने पर दोषियों को अतिरिक्त 2 वर्ष का कठोर कारावास भुगतना होगा। यह फैसला जींद पुलिस की तेज और ठोस जांच तथा उप जिला न्यायवादी सुरेंद्र खटखड़ की मजबूत पैरवी का नतीजा है। मामले ने उस समय पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी थी और व्यापारिक समुदाय में भय का माहौल पैदा कर दिया था।

घटना का पूरा विवरण

बता दें कि 23 नवंबर 2021 को जींद के रोहतक रोड स्थित चौड़ी गली इलाके में श्याम सुंदर बंसल अपने कार्यालय के बाहर कुर्सी पर बैठे थे। उनके साथ भतीजा हन्नी बंसल और भाई अंकुश भी मौजूद थे। अचानक तीन नकाबपोश हमलावरों ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। गोलीबारी में श्याम सुंदर की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि हन्नी बंसल के पैर में गोली लगने से वे गंभीर रूप से घायल हो गए। हन्नी बंसल की शिकायत पर थाना शहर जींद में मुकदमा नंबर 592/2021 दर्ज किया गया। इसमें भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या), 307 (हत्या का प्रयास), 120बी (आपराधिक षड्यंत्र), 34 (साझा इरादा) तथा शस्त्र अधिनियम की धारा 25 के तहत आरोप लगाए गए थे।

दोषी ठहराए गए 11 आरोपी  

सभी आरोपी नरेश, धर्मेंद्र, बलजीत, रोशन, जगदीश (सभी जींद निवासी) प्रदीप उर्फ गाठा, मंजीत उर्फ बंट्टू, पवन, सचिन उर्फ गांधी (सभी हिसार निवासी) राजेश उर्फ लीला (सिसाय निवासी) कुलदीप (खंदराई, सोनीपत निवासी) हैं।

सजा का विस्तृत ब्यौरा

धारा 302 IPC: आजीवन कारावास + ₹25,000 जुर्माना

धारा 120B IPC: आजीवन कारावास + ₹25,000 जुर्माना

धारा 307 IPC: 10 वर्ष कठोर कारावास + ₹15,000 जुर्माना

शस्त्र अधिनियम: 7 वर्ष कठोर कारावास + ₹10,000 जुर्माना

सभी सजाएं एक साथ चलेंगी, लेकिन कुल जुर्माना प्रति दोषी ₹75,000 रहेगा।

पुरानी रंजिश और पुरुषोत्तम हत्याकांड से कनेक्शन

जांच में सामने आया कि यह हत्या 17 अप्रैल 2016 को पुरुषोत्तम बंसल (श्याम सुंदर के भाई) पर हुए जानलेवा हमले से जुड़ी थी। पुरुषोत्तम पर गोलीबारी हुई थी, जिसमें वे घायल हुए थे। श्याम सुंदर इस मामले में मुख्य गवाह थे और उनकी गवाही 24 नवंबर 2021 को होनी थी। पुरुषोत्तम मामले के आरोपी गैंग (बलजीत पोकरी खेड़ी, धर्मेंद्र पहलवान आदि) ने ही सुपारी देकर श्याम सुंदर की हत्या करवाई, ताकि गवाही रुक जाए और पुरानी रंजिश पूरी हो।

रेलवे टेंडर विवाद भी एक कारण बताया गया, लेकिन मुख्य वजह पुरानी दुश्मनी थी।पीड़ित परिवार के वकील और श्याम सुंदर के भाई विनोद बंसल ने फैसले पर संतुष्टि जताई है। उन्होंने कहा, “यह सच्चाई की जीत है और न्याय मिलने से परिवार को सुकून मिला है।” यह फैसला न केवल पीड़ित परिवार के लिए न्याय है, बल्कि पूरे क्षेत्र में अपराधियों के लिए सख्त संदेश भी है।

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