गुजरात एटीएस को ड्रग्स केस में बड़ी सफलता मिली है.  छापेमारी के दौरान 5.9 किलो मेफेड्रोन, कच्चा माल और उपकरण बरामद हुआ. जिनकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लगभग 30 करोड़ रुपये बताई जा रही है. जानकारी के अनुसार, यह मेफेड्रोन दमण में एक फैक्ट्री में तैयार किया जा रहा था और तैयार माल वापी के मनोजसिंह ठाकुर के घर में रखा जाता था, जहां से इसे आगे मुंबई समेत अन्य स्थानों पर सप्लाई किया जाता था.

एटीएस को सूचना मिली थी कि वलसाड जिले के वापी में मेहुल ठाकुर, विवेक राय और मोहनलाल पालीवाल आपसी मिलीभगत से मेफेड्रोन का निर्माण और बिक्री कर रहे हैं. ये लोग दमण के बामनपुजा सर्कल के पास फार्महाउस में पिछले 3-4 महीनों से ड्रग्स तैयार कर रहे थे. इसके बाद तैयार पदार्थ वापी में अपने मकान में रखकर व्यापार करते थे. 02 अक्टूबर 2025 को एटीएस और दमण पुलिस क्राइम ब्रांच की टीम ने वापी और दमण में छापेमारी की. तलाशी अभियान में मेफेड्रोन (सॉलिड और लिक्विड) 5.9 किलो की मात्रा में बरामद हुआ. इसके साथ ही लगभग 300 किलो कच्चा माल, ग्राइंडर, मोटर, ग्लास फ्लास्क, हीटर और अन्य उपकरण भी ज़ब्त किए गए.

मोहनलाल पालीवाल को किया गिरफ्तार

एटीएस के एसपी के. सिद्धार्थ ने बताया कि मोहनलाल पालीवाल को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि मेहुल ठाकुर और विवेक राय फिलहाल फरार हैं. मोहनलाल पहले भी NDPS एक्ट के दो मामलों में गिरफ्तार हो चुका था और पैरोल जंप कर फरार चल रहा था. गिरफ्तार आरोपी के पूछताछ में यह पता चला कि रैकेट में कच्चा माल एकत्र करना, रासायनिक प्रक्रिया के माध्यम से ड्रग्स बनाना और तैयार माल की बिक्री शामिल था.

अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स सप्लाई नेटवर्क की जांच में जुटी एटीएस

जांच जारी है और एटीएस यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी कब से इस अपराध में शामिल थे, ड्रग्स किन जगहों पर और किसे बेची गई, इसके बदले पैसे कैसे मिले और इस रैकेट में और कौन-कौन लोग शामिल थे. अधिकारियों ने कहा कि आरोपी अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स सप्लाई नेटवर्क से भी जुड़े हो सकते हैं, इसलिए गहन जांच चल रही है.

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